बच्चे 15 दिन से भूख और प्यास से त्रस्त, सीनियर आदिवासी छात्रावास के पोषण में गंभीर अनियमितताएं
शिक्षिका ने लगातार BRC को दी सूचना, कलेक्टर महोदया के आदेशों के क्रियान्वयन में स्पष्ट लापरवाही
डिंडोरी, मध्यप्रदेश: डिंडोरी जिले में शिक्षा और पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन (Implementation) में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कलेक्टर महोदया के नियमित निरीक्षण के निर्देशों के बावजूद, विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों के पोषण तथा बुनियादी सुविधाओं को लेकर लापरवाही बरती जा रही है, जो प्रशासनिक सजगता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
खंड-1: विद्यालय में भोजन और जल आपूर्ति का अभाव
सूत्रों से जानकारी मिलने पर 'सत्य प्रहार' की टीम शासकीय एकीकृत शाला, भवरखंडी पहुंची। मौके पर ज्ञात हुआ कि बच्चों को लगातार 15 दिनों से अधिक समय से मध्याह्न भोजन (MDM) उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भूख के साथ-साथ, बच्चों के पीने के पानी तक का कोई उचित प्रबंध विद्यालय में नहीं है। दिखावे के लिए लगी टंकियां और पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं। शिक्षिका श्रीमती लक्ष्मी परस्ते ने बताया कि बच्चों के लिए गाँव से पानी भरकर लाना पड़ता है, क्योंकि पाइपलाइन का कनेक्शन ही अधूरा है। शिक्षिका ने इस संबंध में BRC श्री चौबे सर को लिखित सूचना दी थी, किंतु इस ओर कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
खंड-2: नवीन सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास का पोषण स्तर
यह मामला केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं है। 'सत्य प्रहार' को नवीन सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास, न्योसा की छात्राओं ने गोपनीय जानकारी दी। उनकी सुरक्षा को देखते हुए, उनके नाम या वीडियो उजागर नहीं किए जा रहे हैं।
छात्रावास की कुल स्ट्रेंथ 50 है, और छात्राओं ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता अत्यंत निम्न है। उन्हें सुबह के नाश्ते/भोजन में मुख्य रूप से उबले हुए चावल दिए जाते हैं, और सब्ज़ी में प्रायः सिर्फ आलू होता है। पोषण के लिए अनिवार्य दूध और फल जैसी आवश्यक वस्तुएँ उन्हें कभी भी प्राप्त नहीं हुई हैं।
इस संबंध में जब 'सत्य प्रहार' की टीम छात्रावास पहुँची और वार्डन श्रीमती राजवती धुर्वे से मिलने का प्रयास किया, तो पता चला कि वह हॉस्टल में नहीं हैं।
🔥 उच्च अधिकारियों से संपर्क का अभाव
इस गंभीर स्थिति पर प्रशासन का पक्ष जानने और कलेक्टर महोदया को अवगत कराने के लिए, उच्च अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया:
🍲 मध्याह्न भोजन पर अधिकारियों से संपर्क
मध्याह्न भोजन की महत्वपूर्ण व्यवस्था पर जानकारी हेतु जिला परियोजना समन्वयक (DPC) श्वेता अग्रवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनसे फोन पर बात नहीं हो पाई। इसके बाद, जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्रीमती सुमन परस्ते से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि यह विभाग डीपीसी (DPC) के अंतर्गत आता है।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब बच्चों के भोजन जैसे संवेदनशील विषय पर जवाबदेही की बात आती है, तो अधिकारीगण एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।
💔 क्या यह बच्चों का दोष है?
हमारा कहना यह है कि पद पर कोई भी अधिकारी हो, उसे अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए। मासूम बच्चे अपनी शिकायत लेकर कहाँ गुहार लगाएँ?
आप स्वयं विचार करें कि यदि यही स्थिति आपके बच्चों को देखनी पड़े, तो आपकी मनःस्थिति क्या होगी? क्या उन बच्चों की बस यही गलती है कि वे गरीब हैं? यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद BRC स्तर पर कार्रवाई का अभाव और वरिष्ठ अधिकारियों (DEO, DPC,AC) का मीडिया से संपर्क स्थापित न कर पाना, दर्शाता है कि डिंडोरी में योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। यह आवश्यक है कि कलेक्टर महोदया इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लें और इन गंभीर अनियमितताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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