डिंडोरी। माँ नर्मदा के पावन तट पर स्थित डिंडोरी ज़िले में अवैध शराब का कारोबार बेलगाम हो चुका है। सरकारी दुकानों पर अवैध वसूली और गांव-गांव तक अवैध सप्लाई का यह 'खुला खेल' ज़िले के भविष्य पर भारी पड़ रहा है।
एक तरफ सरकार और ज़िला प्रशासन 'नशा मुक्ति अभियान' चला रहा है, वहीं दूसरी ओर यह गोरखधंधा इस अभियान को बट्टा लगा रहा है, जिससे सरकारी प्रयासों पर गंभीर सवाल उठते हैं।
🚨 पुलिस की नाक के नीचे खुलेआम कारोबार: नर्मदा तट का अपमान
स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि नगर में जहाँ अवैध शराब बेची जाती है, वहीं से मात्र 10 मीटर की दूरी पर अक्सर पुलिस का वाहन रोज़ खड़ा रहता है और पुलिस वालों की तैनाती भी रहती है। शहर के लगभग हर मुख्य चौराहे पर और गली-गली में अवैध शराब बिक रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि माँ नर्मदा के 5 किलोमीटर के क्षेत्र में शासन द्वारा शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी यह गोरखधंधा धड़ल्ले से जारी है, जो धार्मिक और कानूनी दोनों ही मर्यादाओं का उल्लंघन है।
🤝 असली खिलाड़ियों को अभयदान: गरीबों पर हुई कार्रवाई
ज़िला आबकारी अधिकारी श्री पतरस बरा से हर बार मिलने पर यही कहा गया कि MRP से ज़्यादा वसूली करने वाली दुकानों पर और माफिया पर नकेल कसी जाएगी।
लेकिन, कार्रवाई के नाम पर इसके विपरीत हुआ। इस खेल में शामिल असली बड़े खिलाड़ियों पर आज तक किसी ने हाथ डालने की हिम्मत नहीं की। इसके बजाय, छोटी-मोटी गुमटी वालों और गरीब आदिवासियों—जिन्हें शासन द्वारा एक सीमित मात्रा में सेवन हेतु शराब बनाने की छूट प्राप्त है—पर कार्रवाई हुई। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि इस खेल में शामिल प्रभावशाली लोग कितने ताकतवर हैं, जिनके सामने प्रशासन भी नतमस्तक है।
सही जाँच और कार्रवाई तभी सफल होगी जब माफिया के स्रोत यानी बड़े लोगों पर प्रहार होगा, तभी अपने आप निचले स्तर पर रोक लगेगी। जबकि हर बार कार्रवाई छोटे लोगों पर करके वाहवाही लूट ली जाती है।
⚠️ नकली/मिलावटी शराब का अंदेशा: स्वास्थ्य और राजस्व को चूना
अवैध रूप से बेची जा रही इस शराब के नकली या मिलावटी होने का गंभीर अंदेशा है। कुछ रुपयों के लालच में माफिया लोगों के स्वास्थ्य से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके साथ ही, यह अवैध कारोबार राज्य शासन के राजस्व को भी लाखों-करोड़ों का चूना लगा रहा है।
🥃 अवैध अहाते: आबकारी एक्ट का उड़ाया जा रहा मज़ाक
शराब दुकानों के आस-पास ही, खुलेआम अवैध अहाते खोलकर शराब परोसी जा रही है। यह गतिविधि आबकारी एक्ट (Excise Act) का खुला उल्लंघन है, जिसका खुलेआम मज़ाक उड़ाया जा रहा है।
💰 सरकारी दुकानों पर MRP से 20% अधिक वसूली: अधिकारी ने टाला सवाल
एक चौंकाने वाले खुलासे में, हमारी टीम ने स्वयं ज़िले की शराब दुकानों का निरीक्षण किया। मौके पर पाया गया कि दुकानदारों द्वारा ग्राहकों से एमआरपी (MRP) से भी 20 प्रतिशत अधिक मूल्य वसूला जा रहा था। वहीं, इन दुकानों के आसपास अनाधिकृत अहातों/होटलों में शराब परोसी जा रही थी।
कार्रवाई की प्रगति जानने के लिए जब दोबारा अधिकारी से संपर्क किया गया, तो अधिकारी का बार-बार आश्वासन देकर कार्रवाई से मुकर जाना, मिलीभगत या दबाव की आशंका को बढ़ा देता है????
👶 नई पीढ़ी को तस्करी में धकेला जा रहा
सबसे गंभीर आशंका यह है कि अवैध शराब की तस्करी और बिक्री में माफिया अब नई पीढ़ी के बच्चों को लालच देकर धकेल रहे हैं। पैसे के प्रलोभन में आकर नई उम्र के बच्चे इन माफियाओं के चंगुल में फंसते जा रहे हैं।
🌐 माफिया Nexus का खेल
सूत्रों से पता चला है कि कई प्रभावशाली लोग इस माफिया सिंडिकेट के हिस्से हैं। यह पूरा खेल, एक संगठित Nexus (गठजोड़) के तहत चल रहा है, जिसके कारण न पुलिस और न ही आबकारी विभाग कोई बड़ी कार्रवाई कर पाता है। उड़ती उड़ती खबर है कि इन्हीं प्रभावशाली लोगों ने मीडिया के एक वर्ग को भी 'साध' रखा है, जिसकी सत्यता की पुष्टि हम नहीं करते।
⭐ नई कलेक्टर से जगी उम्मीद की किरण
इस पूरे अवैध सिंडिकेट के बीच, ज़िला कलेक्टर अंजू भदौरिया के जिले का प्रभार ग्रहण करने के बाद से लोगों में एक नई उम्मीद जगी है। माँ नर्मदा के इस पावन क्षेत्र के निवासियों को आशा है कि नई कलेक्टर इस भ्रष्ट तंत्र पर कठोर कुठाराघात करेंगी और ज़िले में कानून का राज स्थापित करेंगी।
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