डिंडोरी। जिले के अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का सही मोल दिलाने और खेती को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में शनिवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) के जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में एक विशेष क्रेता-विक्रेता सम्मेलन (Buyer-Seller Meet) का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाना था, बल्कि किसानों को बिचौलियों के जाल से निकालकर सीधे मंडी व्यापारियों और डायरेक्ट मार्केट से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी IAS ने अपनी उपस्थिति से किसानों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में तकनीक और बाजार का समन्वय ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली ताकत है। बैठक के दौरान माहौल तब और अधिक जीवंत हो उठा जब मंडी व्यापारियों और किसानों के बीच एक खुली और बेबाक चर्चा शुरू हुई। किसानों ने अपनी फसलों की बिक्री में आने वाली जमीनी चुनौतियों, जैसे कि सही मूल्य निर्धारण, परिवहन की समस्या और गुणवत्ता मानकों की जटिलताओं को प्रमुखता से रखा। जवाब में व्यापारियों ने भी बाजार की वर्तमान मांग और भविष्य की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए, जिससे दोनों पक्षों के बीच बरसों से चली आ रही संवादहीनता की खाई पटती नजर आई।
तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. के.के. देशमुख और BISA जबलपुर के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. पंकज कुमार ने जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष 2026 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में समर्पित किया गया है, जिसका सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो 'क्लाइमेट रेसिलिएंट' यानी जलवायु अनुकूल बीज और आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं। इस अवसर पर आत्मा परियोजना की सहायक संचालक नेहा धुरिया, मंडी सहायक सचिव प्रीति झारिया और सहायक कृषि अभियंता पामेश भगत ने भी किसानों को सरकारी योजनाओं और यंत्रों के सही उपयोग की जानकारी दी।
मंच पर KVK वैज्ञानिक डॉ. पी.एल. अम्बुलकर सहित BISA के तकनीकी अधिकारी चंदन कुमार और मनीष भारद्वाज ने किसानों को मौसम के मिजाज को समझकर फसल चक्र में बदलाव करने के गुर सिखाए। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित किसानों के चेहरों पर एक नई उम्मीद दिखी। उन्होंने साझा किया कि पहली बार उन्हें खरीदारों के साथ सीधे मेज पर बैठकर अपनी बात कहने का मौका मिला है, जो निश्चित रूप से उनकी आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह आयोजन न केवल जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ, बल्कि डिंडोरी के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की एक सफल पटकथा भी लिख गया।
सत्य प्रहार न्यूज (Satya Prahar News)
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