डिंडौरी: नगर परिषद डिंडौरी द्वारा वार्ड क्रमांक 11 में 520 KL क्षमता वाली पानी की टंकी की सफाई का अभियान शुरू किया गया है। सरकारी प्रेस नोट में इसे 'शुद्ध पेयजल की दिशा में बड़ा कदम' बताया जा रहा है, लेकिन शहर की प्यासी और गंदा पानी पीने को मजबूर जनता इसे केवल आगामी बजट ठिकाने लगाने की 'लीपापोती' मान रही है??
डिंडौरी की जागरूक जनता ने अब नगर परिषद के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे तीखे सवाल दागे हैं।
1. पिछली सफाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं?
नियमों के अनुसार, पेयजल टंकियों की सफाई हर 6 महीने में अनिवार्य है। नगर परिषद डिंडौरी को यह स्पष्ट करना होगा कि:
इस टंकी की पिछली सफाई किस तारीख और किस साल में हुई थी?
पिछली सफाई पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया गया था?
क्या वाकई पिछली बार नियम अनुसार गाद निकाली गई थी, या सिर्फ कागजों पर बिल पास किए गए? जनता मांग करती है कि परिषद पिछली सफाई की लॉग-बुक और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
2. ₹1.20 करोड़ का 'नर्मदा प्रोजेक्ट' आखिर गया कहाँ?
डिंडौरी के लिए सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि माँ नर्मदा के संरक्षण के लिए 1.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीवर का पानी रोकने के लिए स्वीकृत हुई थी।
जवाब दे परिषद: आज भी शहर की नालियों और सीवर का जहर नर्मदा में क्यों मिल रहा है?
नर्मदा के नाम पर आए पैसे का हिसाब डिंडौरी की जनता मांग रही है।
3. छलनी पाइपलाइनें: मौत को दावत दे रही जल वितरण प्रणाली
परिषद चाहे टंकी को सोने से मढ़ दे, लेकिन जब तक डिंडौरी की फूटी और जर्जर पाइपलाइनें नहीं बदली जाएंगी, तब तक शुद्ध पानी मिलना नामुमकिन है।
शहर में जगह-जगह पाइपलाइनें फूटी हुई हैं, जो सीधे नालियों के संपर्क में हैं।
गंदा और बदबूदार पानी घरों तक पहुँच रहा है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है। टंकी साफ करने का ढिंढोरा पीटने वाली परिषद इन सड़ चुकी पाइपलाइनों पर चुप्पी क्यों साधे हुए है?
जनता की दो टूक: फोटोबाजी बंद करो, श्वेत पत्र जारी करो!
डिंडौरी के नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल फोटो खिंचवाने के लिए टंकी की सफाई करवाता है। यदि परिषद वाकई ईमानदार है, तो उसे शहर की पेयजल व्यवस्था पर एक 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करना चाहिए, जिसमें पिछली सफाई का खर्च, पाइपलाइन बदलने का रोडमैप और ₹1.20 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति का पूरा ब्योरा हो।
"डिंडौरी की जनता को अब 'प्रयास' नहीं, 'परिणाम' चाहिए। माँ नर्मदा के जल को प्रदूषित करने और जनता की सेहत से खिलवाड़ करने का हिसाब देना ही होगा।"
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