डिंडोरी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत सख्त प्रयोगशाला परीक्षण (Lab Testing) के नियम निर्धारित हैं। इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे मिट्टी, गिट्टी, और बिटुमेन मानकों के अनुरूप हों।
मगर,
मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास
प्राधिकरण (MPRRDA) के
डिंडोरी PIU (Project Implementation Unit) से जुड़ी एक चौंकाने वाली जानकारी सामने
आई है, जिसने जिले में
सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर आशंकाएँ खड़ी कर दी हैं।
🔬 PMGSY के
नियम 4 का कथित उल्लंघन
PMGSY के नियम
4 के अनुसार, सभी परीक्षण अनिवार्य रूप से सुसज्जित
फील्ड लैब (Competent Site Lab) में किए जाने चाहिए।
सूत्रों
के हवाले से जानकारी: हमारी जानकारी में यह आशंका आई है कि डिंडोरी में
MPRRDA की गुणवत्ता नियंत्रण
लैब सालों
से बंद पड़ी हो सकती है।
यदि यह आशंका सच है, तो
यह सीधा सवाल खड़ा करता है कि लाखों की लागत से बनी यह लैब क्यों उपयोग में नहीं
लाई जा रही है।
अधिकारी
लगे क्लैरिकल कार्य में? सूत्रों
ने यह भी संकेत दिया है कि टेस्टिंग के लिए पदस्थ महत्वपूर्ण कर्मचारी लैब के बजाय
कथित तौर पर दफ्तरी (Clerical) कार्यों
में अधिक संलग्न हैं।
📝 टेस्टिंग
रिपोर्टों की प्रमाणिकता पर संदेह
सबसे
गंभीर प्रश्न यह है कि यदि लैब उपयोग में नहीं है, तो सड़कों के निर्माण कार्य और मटेरियल
की टेस्टिंग की रिपोर्टें न सिर्फ जारी हो रही हैं, बल्कि आसानी से 'पास' भी हो रही हैं।
यह
स्थिति संदेह पैदा करती है कि:
क्या अनिवार्य परीक्षण जैसे CBR टेस्ट, कम्पेक्शन (घनत्व) परीक्षण, और बिटुमेन पेनिट्रेशन (जो सड़क की दीर्घायु सुनिश्चित करते हैं) केवल कागजों पर ही हो रहे हैं?
क्या गुणवत्ता नियंत्रण रजिस्टर (Quality Control Register) में दर्ज परिणाम वास्तविक परीक्षणों पर आधारित हैं या केवल औपचारिक खानापूर्ति?
⚠️ निर्माण
की नींव कमजोर होने की आशंका
PMGSY के
नियम सामग्री
के अनिवार्य परीक्षण और मार्शल मिक्स डिज़ाइन पर ज़ोर देते हैं
ताकि सड़क की मजबूती सुनिश्चित हो सके।
यदि लैब बंद है, तो यह आशंका है कि: सड़कों में उपयोग हो रही मिट्टी की उपयुक्तता, गिट्टी की गुणवत्ता, और तारकोल के मिश्रण को बिना किसी वैज्ञानिक जाँच के ही इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति डिंडोरी में बन रही सड़कों की नींव को कमजोर कर सकती है और भविष्य में सड़कों के जल्द खराब होने की आशंका को बढ़ाती है।
कलेक्टर
श्रीमती अंजू पवन भदौरिया करें संज्ञान
बंद पड़ी लैब से टेस्टिंग रिपोर्ट जारी
होने का यह पूरा मामला गहन जाँच का विषय
है। यह सीधे तौर पर MPRRDA अधिकारियों
और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सत्य प्रहार की ओर से डिंडोरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया से विनम्र अनुरोध है कि वे इस पूरे प्रकरण का संज्ञान
लें। उन्हें तत्काल एक उच्च-स्तरीय टीम
गठित करनी चाहिए जो MPRRDA लैब की वास्तविक स्थिति की जाँच करे और यह सुनिश्चित करे कि
जनता के पैसे से बन रही सड़कों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
🚨 अस्वीकरण और उच्च-स्तरीय जाँच की मांग 🚨
हम (सत्य प्रहार) इन सभी तथ्यों की पुष्टि नहीं करते हैं। हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जाँच (High-Level Inquiry) हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो और सत्य जनता के सामने आ सके। हम इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई और जाँच की उम्मीद करते हैं।हम यह नहीं कहते कि सब गलत हैं, लेकिन जब दाल में काले की जगह पूरी दाल ही काली लगे, तो आवाज उठाना जरूरी है।
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