डिंडौरी में स्थित जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह 120 सीटर सीनियर बालक छात्रावास से आज प्रशासनिक अनदेखी और भारी अव्यवस्थाओं की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। कागज़ों में 120 सीटर बताए जाने वाले इस छात्रावास में सीमित जगह में क्षमता से अधिक छात्रों को रखने के लिए मजबूर किया गया है, जहाँ मूलभूत सुविधाओं के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति की जा रही है। आज सुबह जब सत्य प्रहार न्यूज़ की टीम धरातल पर सच्चाई जानने छात्रावास पहुँची, तो वहाँ का नज़ारा देखकर प्रशासनिक दावों की पोल पूरी तरह खुल गई।छात्रावास परिसर में बने गहरे सीमेंट के हौद के मुहाने पर खड़े होकर मासूम छात्र बाल्टी और वॉटर कैन में पानी भरते नज़र आए। पीने के पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बच्चे रोज़ाना अपनी जान जोखिम में डालकर हौद के किनारे खड़े होने को मजबूर हैं, जहाँ ज़रा सी भी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके अलावा छात्रावास के रसोईघर में भी स्थिति बेहद ख़राब मिली। 12वीं कक्षा के छात्रों ने कैमरे के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें पिछले 4 सालों से सड़े-गले आलू की सब्जी, पानी जैसी पतली दाल और कीड़े वाले चावल परोसे जा रहे हैं। गैस सिलेंडर की व्यवस्था होने के बावजूद खाना आज भी खुले शेड में लकड़ियों के चूल्हे पर पकाया जा रहा है।
सफ़ाई व्यवस्था का आलम यह है कि छात्रावास के बरामदों में कीचड़ जमा है और शौचालयों की स्थिति इतनी बदतर है कि अंदर जाना भी मुश्किल है। नियमित सफ़ाई न होने से परिसर में गंभीर बीमारी फैलने का ख़तरा मंडरा रहा है। जब इस पूरी बदहाली और बच्चों के गंभीर आरोपों को लेकर सत्य प्रहार न्यूज़ ने छात्रावास अधीक्षक राजेश चौरे से सवाल किया, तो उन्होंने सफ़ाई देते हुए दावा किया कि छात्रावास में गुणवत्तायुक्त भोजन दिया जाता है और वे स्वयं मौजूद रहकर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाते हैं। एक तरफ़ कैमरे के सामने बच्चों का दर्द और गंदे शौचालयों की तस्वीरें सच बयां कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ ज़िम्मेदार अधिकारी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कड़ा संज्ञान लेता है।
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