जन संवाद के दौरान नागरिकों ने सीवर लाइन के नाम पर शहर में की गई बेतरतीब खुदाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। लोगों ने शिकायत की कि इस अव्यवस्थित कार्य के कारण पहले से बनी हुई पक्की नालियां और अधिक क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे जल निकासी की समस्या विकट हो गई है। साथ ही कई नागरिकों ने अधूरी सड़क, पड़ोसी विवाद जैसे रोजमर्रा के मुद्दे सामने रखे कलेक्टर और एसडीएम की इस जनहितैषी कार्यशैली की जहां एक ओर चारों ओर प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस कार्यक्रम में नगर परिषद की भारी अकर्मण्यता और लापरवाही खुलकर सामने आ गई। स्थिति तब और असहज हो गई जब हमने नगर परिषद के सीएमओ से शहर में घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या के समाधान को लेकर सवाल पूछा। प्रशासनिक रूप से जवाब देने की जिम्मेदारी सीएमओ की होती है, लेकिन हैरानी तब हुई जब सीएमओ के बजाय एक महिला कर्मचारी बीच में कूद पड़ी और अपनी तरफ से सफाई देने लगी, जबकि उन्हें इसका कोई अधिकार ही नहीं था, आखिर उक्त कर्मचारी विभाग में किस पद पर है क्या सीएमओ ने उन्हें अपने विभाग में मीडिया से सवाल जवाब पर रखा है ये सवाल हम सीएमओ साहब से पूछेंगे क्योंकि मौके पर तो यही दिख रहा था ।
जब जिम्मेदार अधिकारियों के सामने इस तरह पत्रकारों की बात काटी जाती है और बीच-बचाव किया जाता है, तो यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि जब पत्रकारों के साथ ऐसा रवैया अपनाया जा रहा है, तो आम जनता के साथ इस तुगलकीशाही और मनमाने तरीके से चलने वाली नगर परिषद में आने वाले आम नागरिकों का
क्या हाल होता होगा? यह एक बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इसके अलावा, सीएमओ द्वारा पूर्ण बताए गए विकास कार्यों की जो जानकारियां दी गईं, वे पूरी तरह से ग्राउंड रियलिटी से मेल नहीं खाती थीं। इस पर मीडिया की ओर से यह साफ संदेश है कि संबंधित विभागों को ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में पूरी तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ आना चाहिए, साथ ही अपने अमले को जनता और मीडिया से बात करने की शालीनता सिखानी चाहिए, क्योंकि ऐसा रूखा व्यवहार प्रशासनिक छवि को धूमिल करता है।
कार्यक्रम के दौरान शहर की स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए कलेक्टर और एसडीएम ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों के आसपास साफ-सुथरा माहौल बनाए रखें, रोड पर कचरा न फेंके और नालियां जाम न होने दें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अपने शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए हम सभी में 'सिविक सेंस' होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही चौपाल में बकाया कर (टैक्स) जमा करने को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर और एसडीएम ने लोगों से समय पर कर जमा करके प्रशासन का सहयोग करने की अपील की और घोषणा की कि जल्द ही इसके लिए हर वार्ड में विशेष शिविर और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कर वसूली को लेकर प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए यह निर्देश भी दिए गए कि राजस्व का अमला वसूली के लिए तभी मैदान में उतरेगा, जब संबंधित वार्ड के पार्षद और नगर परिषद के कर्मचारी भी उनके साथ मौजूद रहेंगे, ताकि जनसहयोग से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सके।
कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर ने नगर परिषद के अधिकारियों, कर्मचारियों और क्षेत्र के पार्षदों को भी सख्त हिदायत दी कि वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं से रूबरू हों, ताकि जो छोटी-छोटी समस्याएं आज नजरअंदाज होने पर बड़ा रूप ले लेती हैं, उनकी भविष्य में पुनरावृत्ति न हो सके। कलेक्टर अंजू भदोरिया और एसडीएम राम बाबू देवांगन की इस जनता के बीच पहुंचकर संवाद करने की पहल से स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के प्रति एक नई उम्मीद जगी है, बशर्ते नगर परिषद का अमला अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाकर इस प्रशासनिक मंशा पर खरा उतरे।
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