अमृत 2.0 और तालाब सौंदर्यीकरण जांच में बड़ा खुलासा: 68 लाख की गड़बड़ी और लापरवाह अधिकारियों पर गिर सकती है गाज




डिंडौरी नगर में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों, सीवर लाइन और तालाब सौंदर्यीकरण में सामने आई गंभीर वित्तीय व तकनीकी अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। कार्यालय कलेक्टर जिला डिंडौरी के आदेश के तहत इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था, जिसमें अपर कलेक्टर जे.पी. यादव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री अफजल अमानुल्लाह और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा शामिल रहे। इस समिति ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और अपना विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, तालाब के कैचमेंट एरिया, नहर और वेस्ट वियर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य पाए गए हैं। इसके अलावा, इसी तालाब के सौंदर्यीकरण के कार्यों में नगर परिषद के माध्यम से लगभग 68 लाख रुपये की राशि खर्च किए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें बिना पर्याप्त परीक्षण और सत्यापन के भुगतान किए जाने से वित्तीय नियमों की अनदेखी और शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कार्यप्रणाली संतोषजनक न होने के कारण अशुद्ध पानी सीधे तालाब में मिल रहा है, जिससे जलीय जीवन और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है।

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जांच प्रतिवेदन के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन पर प्रशासनिक लापरवाही और अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने का आरोप है। इनमें नगर परिषद के तत्कालीन CMO अमित तिवारी और उपयंत्री शिवराज बघेल, जल संसाधन विभाग के तत्कालीन EE एस.के. शर्मा व उपयंत्री विहान शुक्ला, तथा MPUDC के संबंधित अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, राजस्व अमले यानी तत्कालीन तहसीलदार रामप्रसाद मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत सिंह उइके और हल्का पटवारी बलीराम भवेदी पर स्थल स्थिति का निष्पक्ष आकलन किए बिना भ्रामक और तथ्य-विपरीत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का भी गंभीर आरोप है।

प्रशासन द्वारा इन सभी के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित किए जाने, प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर प्रमुख जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने, संपूर्ण परियोजना की स्वतंत्र तृतीय पक्ष जांच (Third Party Audit) और विशेष लेखा परीक्षण (Special Audit) कराए जाने की संस्तुति की गई है। साथ ही, वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने तथा पूरे मामले को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और लोकायुक्त संगठन को प्रेषित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। 

जिला कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (IAS) ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से कार्यालयीन जांच दस्तावेजों, प्रशासनिक प्रतिवेदनों और आधिकारिक BITES पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े तथ्यों को निष्पक्षता के साथ पाठकों के सामने रखना है।

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