मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों पर मंडराया संकट: एक हफ्ते की छुट्टी पड़ सकती है नौकरी पर भारी

 भोपाल। मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में इन दिनों एक नए सरकारी आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। यह आदेश उन हजारों अतिथि शिक्षकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो पिछले कई वर्षों से कम मानदेय पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की नींव मजबूत कर रहे हैं।  लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने अब अनुशासन के नाम पर एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिससे अतिथि शिक्षकों की रातों की नींद उड़ गई है।


दरअसल, मामला अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति से जुड़ा है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि पोर्टल 3.0 के माध्यम से नियुक्त कोई भी अतिथि शिक्षक लगातार एक सप्ताह तक स्कूल से अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसे तुरंत उसके पद से कार्यमुक्त (Relieve) कर दिया जाएगा। इस आदेश में सबसे सख्त बात यह है कि स्कूल के प्रभारियों और प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे बिना किसी देरी के ऐसे शिक्षकों को पोर्टल से बाहर कर दें। यदि कोई प्राचार्य ऐसा करने में लापरवाही बरतता है, तो खुद उस पर भी विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

इस आदेश के बाहर आते ही अतिथि शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश अतिथि शिक्षक समन्वय समिति  ने इस निर्णय को सीधे तौर पर 'अमानवीय' और 'तानाशाही' करार दिया है। उनका कहना है कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। मध्य प्रदेश अतिथि शिक्षक समन्वय समिति ने चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए, उसे कारण बताओ नोटिस जारी होना चाहिए और एक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन इस नए नियम में ऐसी किसी भी प्रक्रिया का जिक्र नहीं है, जो कि सीधे तौर पर शिक्षकों के अधिकारों का हनन है।

संगठन का मानना है कि इस नियम का भविष्य में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो सकता है। यदि किसी स्कूल के अधिकारी या प्राचार्य की किसी शिक्षक से निजी रंजिश है, तो वे मामूली कारणों या मजबूरी में ली गई छुट्टियों को आधार बनाकर उन्हें नौकरी से बेदखल कर सकते हैं। बीमार होना या परिवार में किसी अनहोनी का होना एक मानवीय स्थिति है, लेकिन विभाग का यह 'एक हफ्ते का नियम' इन परिस्थितियों को समझने के लिए तैयार नहीं दिखता।

अब प्रदेश भर के अतिथि शिक्षकों ने सरकार को खुली चेतावनी दे दी है।  शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया या इसमें जरूरी संशोधन नहीं किए गए, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग अपने इस सख्त रवैये पर कायम रहता है या शिक्षकों के बढ़ते विरोध को देखते हुए बीच का कोई रास्ता निकाला जाता है।

सत्य प्रहार न्यूज के लिए भोपाल से विशेष रिपोर्ट।

"सत्य प्रहार न्यूज़ को विभागीय सूत्रों से मिली अपुष्ट जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग में अनुशासन को लेकर यह बड़ा बदलाव किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत आदेश की बारीकियों का इंतज़ार है।"

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