जिला प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में साप्ताहिक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी व्यथा सुनाई। जनसुनवाई में कुल 70 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष गंभीर मामलों के लिए समय-सीमा तय कर अधिकारियों को जवाबदेही सौंपी गई।
विधायक की मौजूदगी और संबल योजना पर गंभीर रुख
जनसुनवाई के दौरान एक भावुक मामला सामने आया जब ग्राम विचारपुर मुड़की निवासी श्रीमती उर्मिला मरावी अपने दिवंगत पति की संबल योजना की अनुग्रह राशि के लिए गुहार लगाने पहुंचीं। प्रार्थिया के साथ विधायक श्री ओमप्रकाश धुर्वे भी मौजूद रहे। उर्मिला ने बताया कि उनके पति स्व. जगदीश कुमार की 2023 में बीमारी से मृत्यु हो गई थी, लेकिन जबलपुर अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र न मिल पाने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
कलेक्टर ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग और जनपद सीईओ को सीधे जबलपुर अस्पताल से संपर्क करने और तत्काल दस्तावेज तैयार कर सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। इसी तरह, ग्राम सूरजपुरा माल निवासी हेम कुमार ने अपनी पत्नी की मृत्यु के चार साल बाद भी सहायता राशि न मिलने की शिकायत की, जिस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जांच के आदेश दिए।
बिजली और आंगनवाड़ी की मांग को लेकर पहुंचे ग्रामीण
प्रशासनिक अमले के सामने बुनियादी सुविधाओं के अभाव के मामले भी प्रमुखता से आए। ग्राम दियावार के ग्रामीणों ने शिकायत की कि 'पीएम जन मन' योजना के तहत बैगा परिवारों के लिए तीन महीने पहले ट्रांसफॉर्मर तो लगाए गए, लेकिन वे अब तक चालू नहीं हुए हैं। कम वोल्टेज के कारण ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
वहीं, विकासखंड समनापुर के ग्राम कांदावानी से आए लोगों ने मिनी आंगनवाड़ी केंद्र खोलने की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान आंगनवाड़ी 5 किमी दूर होने के कारण छोटे बच्चों को पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है और न ही वे वहां तक जा पा रहे हैं।
अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की हिदायत
सुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर श्री जेपी यादव, सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी सहित अन्य विभागीय प्रमुख उपस्थित रहे। कलेक्टर श्रीमती भदौरिया ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्रता रखने वाले हर हितग्राही को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिले, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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