डिंडौरी का बहुचर्चित अमानक चावल मामला: शुरुआत से आज तक की निष्पक्ष पड़ताल

 


कब और कैसे सामने आई घटना?

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में गरीबों के राशन वितरण से जुड़ी कस्टम मिलिंग नीति के तहत सरकारी और निजी गोदामों में जमा कराए गए फोर्टिफाइड चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान जांच टीमों ने पाया कि खनूजा गोदाम, लक्ष्मी अग्रवाल गोदाम, मां नर्मदा और मेकल सुता जैसे परिसरों में रखा हजारों क्विंटल चावल अमानक, घटिया और उपभोग के पूरी तरह अयोग्य था। खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की प्रारंभिक जांच में कुल मिलाकर लगभग 5,800 से 6,800 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल रिजेक्ट श्रेणी का पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 27 करोड़ रुपये बताई गई।

जांच की जद में आए मिलर्स और आरोप-प्रत्यारोप का दौर

मामला उजागर होते ही जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल (गिद्धा), वाहेगुरु राइस मिल (मानिकपुर), मां नर्मदा राइस मिल (कोहका) तथा खनूजा राइस मिल (मढ़ियारास) को मुख्य रूप से जांच के दायरे में लिया। प्रशासन द्वारा संबंधित मिलर्स को एक के बाद एक 7 से अधिक नोटिस जारी कर अपने खर्च पर अमानक चावल उठाने और उसकी जगह मानक चावल जमा करने के कड़े निर्देश दिए गए। नोटिस के जवाब में जहां कुछ मिलर्स अमानक चावल बदलकर नया स्टॉक देने पर सहमत हुए, वहीं कुछ अन्य मिलरों ने गोदाम प्रभारियों की लचर व्यवस्था का हवाला देते हुए जिम्मेदारी से पलायन करने की कोशिश की, जिससे मिलर्स और गोदाम प्रबंधन के बीच खींचतान शुरू हो गई।

प्रशासनिक कड़ाई और भोपाल को भेजा गया कड़ा प्रस्ताव

मिलर्स की ओर से लगातार की जा रही टालमटोल को देखते हुए कलेक्टर और नान डिंडौरी के प्रभारी/डिप्टी कलेक्टर के निर्देशों के तहत नागरिक आपूर्ति निगम (नान) भोपाल के महाप्रबंधक को एक विस्तृत और कड़ा प्रस्ताव भेजा गया। इस प्रस्ताव में नीति के नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषी मिलर्स से अमानक खाद्यान्न का पूरा मूल्य वसूलने, मिलिंग राशि का 4 गुना जुर्माना ठोकने, संबंधित राइस मिलों को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने और रिजेक्टेड स्टॉक के वैधानिक निपटान की सिफारिश की गई।

आज की स्थिति और जांच एजेंसियों का शिकंजा

मामले के व्यापक स्तर को देखते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) और राज्य स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) द्वारा धान-चावल उपार्जन चक्र, वित्तीय अनियमितताओं और अंतर-जिला कड़ियों की गहन पड़ताल शुरू की गई, जो आज की तारीख तक समानांतर रूप से जारी है।

सूत्रों से पता चला है कि यह अमानक चावल पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) में खपाया जा रहा है और कुछ मिलर्स के तार इस खेल से जुड़े हुए हैं, जिसमें विभागीय मिलीभगत की भी आशंका है। हमने अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचा दी है और जल्द ही उनसे मिलकर इसके ऊपर नवीनतम अपडेट, आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की सटीक जानकारी पाठकों के सामने रखेंगे। अब इंतजार है 'नान' के ऑफिसर और अधिकारियों की जांच रिपोर्ट का, हमारी नजर लगातार बनी हुई है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):

प्रकाशन सूचना: यह समाचार रिपोर्ट प्रशासनिक दस्तावेजों, जारी किए गए नोटिसों, आधिकारिक पत्राचारों एवं मीडिया/सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर जनहित में प्रकाशित की गई है। खबर में प्रयुक्त 'कथित', 'आशंका' एवं 'सूत्रों के अनुसार' जैसे संदर्भ प्रक्रियाधीन जांच की स्थिति को दर्शाते हैं। 'सत्य प्रहार' किसी भी पक्ष पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाता है। इस मामले में संबंधित पक्षों के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाता है और अंतिम जांच रिपोर्ट/न्यायालयीन निर्णय ही मान्य होगा।

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