डिंडौरी जिले में जनसुनवाई में सामने आई एक परिवार की समस्या ने कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक प्रशासनिक व्यवस्था का आधार तैयार कर दिया है। वार्ड क्रमांक 12 निवासी श्रीमती सुलोचना बाई के परिवार पेंशन प्रकरण के त्वरित निराकरण के बाद, कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने पूरे जिले के लिए कड़े और दूरदर्शी निर्देश जारी किए हैं। अब कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति से 6 माह पूर्व पेंशन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और हर शनिवार विभागवार समीक्षा होगी।
क्या था पूरा मामला और कैसे मिला तत्काल न्याय
सहायक शिक्षक के रूप में सेवाएं देने वाले स्वर्गीय श्री रोहिणी प्रसाद पनिका की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी श्रीमती सुलोचना बाई को लंबे समय से लंबित परिवार पेंशन नहीं मिल पा रही थी। इसे लेकर उन्होंने 22 सितंबर को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था।
कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अमरपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी को तत्काल तलब किया और कुछ ही घंटों के भीतर परिवार पेंशन का प्रकरण स्वीकृत कराते हुए उसका निराकरण कर दिया। इसके अगले दिन यानी 23 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में श्रीमती सुलोचना बाई और उनकी बेटी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जहाँ कलेक्टर ने खुद उनसे मिलकर व्यवस्था की पुष्टि की।
कलेक्टर के सख्त निर्देश: अब किसी को नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसी भी कर्मचारी या उसके परिवार को वैधानिक अधिकारों के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं लागू की गई हैं:
6 महीने पहले शुरू होगी प्रक्रिया: जिस कर्मचारी की सेवानिवृत्ति प्रस्तावित है, उसकी पेंशन और अन्य देय स्वत्वों (जीपीएफ, जीआईएस, उपादान, अवकाश नगदीकरण) की कागजी कार्रवाई रिटायरमेंट से 6 महीने पहले ही शुरू कर दी जाएगी।
प्रत्येक शनिवार विभागवार समीक्षा: अब हर शनिवार को सभी विभागों के लंबित पेंशन प्रकरणों की समीक्षा बैठक होगी, जिसमें डेडलाइन तय कर मामलों का निपटारा किया जाएगा।
दिवंगत कर्मचारियों के परिवार प्राथमिकता पर: सेवारत काल में दिवंगत हुए कर्मचारियों के आश्रितों के परिवार पेंशन प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी-अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी।
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