डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत डिंडौरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कसईसोंढा से वित्तीय अनियमितता का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीण विकास योजनाओं में चल रही लापरवाहियों की पोल खोल दी है। वर्ष 2021 में आदिवासी विकास परियोजना के तहत स्वीकृत सीसी रोड निर्माण में भारी वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर प्रशासन ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्राथमिक शाला भवन से अनुसुईया के घर तक नीचे टोला तक सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसके विरुद्ध 7 लाख रुपये का भारी-भरकम आहरण कर लिया गया था, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही निकली।
जब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तकनीकी मूल्यांकन कराया गया, तो विभागीय अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच में सामने आया कि मौके पर मात्र 1.70 लाख रुपये का ही निर्माण कार्य कराया गया था, जबकि कागजों में बड़ी रकम ठिकाने लगा दी गई। इस तरह नियमों को ताक पर रखकर सीधे तौर पर 5.30 लाख रुपये की राशि का नियम विरुद्ध आहरण किया गया, जो शासकीय धन के दुरुपयोग का एक स्पष्ट उदाहरण है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता के खुलासे के बाद मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत पूर्व सरपंच और पूर्व सचिव के विरुद्ध सख्त देयता निर्धारण की कार्रवाई की गई।
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत पूर्व सचिव ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने हिस्से की 2.65 लाख रुपये की राशि पहले ही 14 फरवरी 2025 को शासन कोष में जमा कर दी थी। लेकिन, पूर्व सरपंच श्री नोखेलाल परस्ते की तरफ से लगातार उदासीनता बरती गई और शेष 2.65 लाख रुपये की वसूली के लिए अधिनियम की धारा 92 के तहत प्रकरण क्रमांक 304/2025-26 पंजीबद्ध किया गया। प्रशासन की ओर से पूर्व सरपंच को बकाया राशि जमा करने के लिए कई बार पर्याप्त और युक्तियुक्त अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद उनकी तरफ से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विचारण के उपरांत 29 जनवरी 2026 को अंतिम आदेश पारित किया गया था, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि आगामी 15 दिवस के भीतर 2.65 लाख रुपये शासन कोष में जमा कराए जाएं। तय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब राशि जमा नहीं हुई, तब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब संबंधित सक्षम अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे श्री नोखेलाल परस्ते को अपनी अभिरक्षा में लें और पकड़े जाने की तारीख से लेकर पूरे 30 दिवस की अवधि के लिए कारावास में भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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