शाहपुरा, 5 सितंबर 2026:
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले शासकीय आदर्श महाविद्यालय, शाहपुरा में शिक्षक दिवस का पावन पर्व इस वर्ष अत्यधिक भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। आधुनिक दौर में जहां पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं इस महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारतीय प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल पेश की। युवा पीढ़ी ने अपने गुरुओं का तिलक लगाकर, पुष्पगुच्छ भेंट कर और आदरपूर्वक आशीर्वाद प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि संस्कार और संस्कृति आज भी हमारी युवा शक्ति की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
विद्यार्थियों के हाथों में रही पूरे आयोजन की कमान
इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें पूरी व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी खुद महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने संभाली। मंच संचालन से लेकर अतिथियों के स्वागत और कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने तक, युवाओं ने अपनी नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में द्वारका प्रसाद, श्लोक वर्मन, भूमिका, रुकमणी और किशन राय जैसे मेधावी विद्यार्थियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी इस प्रशासनिक और सांस्कृतिक कुशलता की प्रशंसा महाविद्यालय के प्राचार्य सहित सभी प्राध्यापकों ने खुले दिल से की।
वक्ताओं के उद्बोधन: असफलता से सीख और संघर्ष ही सफलता की कुंजी
समारोह के दौरान महाविद्यालय के विद्वान प्राध्यापकों और अतिथियों ने अपने उद्बोधन से विद्यार्थियों के भीतर ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया:
प्राचार्य प्रो. पी.एस. वरकड़े के प्रेरक विचार:
प्राचार्य महोदय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सच्चा शिक्षक केवलता पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि छात्र को जीवन की वास्तविक चुनौतियों से लड़ना और जीना सिखाता है। विद्यार्थी जीवन भविष्य की नींव है, और इस नींव को मजबूत करने के लिए अनुशासन तथा कठोर परिश्रम अनिवार्य है।
डॉ. एल.एन. साहू का संघर्ष का संदेश:
डॉ. साहू ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष है। राह में कितनी भी बाधाएं आएं, कभी हार नहीं माननी चाहिए। असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है, और जो छात्र असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ता है, वही इतिहास रचता है।
डॉ. नरेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा 'दिनकर' की कविता का ओजस्वी पाठ:
कार्यक्रम के दौरान डॉ. ठाकुर ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध ओजस्वी रचना 'कलम या तलवार' का सजीव पाठ किया। उनकी इस प्रस्तुति ने पूरे सभागार में देशभक्ति और ज्ञान की अलख जगा दी। उन्होंने कहा कि विचार और ज्ञान की शक्ति (कलम) समाज को नई दिशा देती है, इसलिए युवाओं को अपने बौद्धिक कौशल को हमेशा धारदार बनाए रखना चाहिए।
विशेष अतिथि श्री बिहारी लाल साहू के सुझाव:
विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित श्री बिहारी लाल साहू ने मानसिक स्वास्थ्य और प्रसन्नता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ और सकारात्मक रहना सबसे जरूरी है। चेहरे पर मुस्कान और दिल में अटूट विश्वास के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति हर मुकाम हासिल कर सकता है।
महाविद्यालय परिवार की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में शाहपुरा महाविद्यालय के पूरे स्टाफ ने अपना योगदान दिया। इस अवसर पर श्री भागवत सिंह धुर्वे, डॉ. वीणा शिवहरे, सुश्री कृति जैन, आकांक्षा कुशराम, श्री मधुर मरावी, श्री अभिषेक पटेल, डॉ. ए.के. झारिया, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. रश्मी चक्रवर्ती, डॉ. राजू रैदास, डॉ. सी.एल. रैदास, डॉ. खेमराज कन्नौजिया, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, डॉ. नीरज गुप्ता, श्री आलोक डहेरिया, डॉ. प्रतिभा उरमलिया, डॉ. सुषमा मिश्रा, डॉ. सुजाता, श्री विशाल राजपूत और श्री कैलाश सहित समस्त सह-प्राध्यापक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सत्य प्रहार (Satya Prahar) के लिए शाहपुरा (डिंडौरी) से विशेष रिपोर्ट।

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