डिंडोरी में शिक्षक दिवस और आचार्य सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय शिक्षा पद्धति के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनुविभागीय अधिकारी राम बाबू देवांगन रहे, जबकि अध्यक्षता तिलक बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार अवधिया ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि राम बाबू देवांगन का शाल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया। साथ ही, समारोह में उपस्थित शासकीय सेवा निवृत्त शिक्षक चेतन दास नागेश सहित अन्य सेवानिवृत्त आचार्यों, समिति सदस्यों, आचार्य दीदियों और विद्यालय के सेवक बंधुओं को भी सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि राम बाबू देवांगन ने अपने संबोधन में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने जन्मदिवस को शिक्षकों को समर्पित कर एक अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति के विरोध और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा वर्तमान और भविष्य गुरुओं के आदर्शों पर चलकर ही उज्ज्वल बनता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अशोक कुमार अवधिया ने मैकाले की शिक्षा पद्धति के दुष्परिणामों से युवाओं को सतर्क रहने की बात कही। व्यवस्थापक नरेन्द्र सिंह राजपूत ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे केवल छात्रों को शिक्षित ही न करें, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता और उत्तम व्यक्तित्व का विकास करें। कोषाध्यक्ष श्रीमती सपना जैन ने जीवन में माता-पिता, शिक्षक और धर्म गुरु के चार चरणों के महत्व को समझाया, जबकि संस्था प्रधान देवेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने डॉक्टर राधाकृष्णन के शिक्षक से लेकर उपराष्ट्रपति तक के प्रेरणादायी सफर का वर्णन किया।
कार्यक्रम का संचालन किशोर भारती एवं कन्या भारती के भैया-बहिनों द्वारा बेहतरीन ढंग से किया गया। अंत में संस्था प्रमुख देवेन्द्र नाथ चतुर्वेदी के आभार प्रदर्शन के बाद कल्याण मंत्र के साथ इस प्रेरणादायक समारोह का समापन हुआ।




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