डिण्डौरी / सत्य प्रहार (विशेष रिपोर्ट)
कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक एक तरफ जहां जिले के विकास कार्यों और प्रशासनिक समीक्षा को लेकर चर्चा में रही, वहीं दूसरी तरफ परिसर में खड़े कुछ विशिष्ट वाहनों पर लगे नियमों के कथित उल्लंघनों ने सुर्खियां बटोर लीं। बैठक में शामिल होने आए कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और एक जनप्रतिनिधि के वाहनों पर आरटीओ (परिवहन) नियमों के विरुद्ध तख्तियां, नंबर प्लेट की स्थिति और कांच पर काली फिल्म को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटनाक्रम: क्या दिखा कलेक्ट्रेट परिसर में? प्राप्त जानकारी और मौके की दृश्यावलियों के अनुसार, मंगलवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में शिरकत करने पहुंचे कई विभागों के प्रमुखों और जनप्रतिनिधि की गाड़ियों में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों की अनदेखी साफ तौर पर नजर आई। बैठक में पहुँची एक प्रमुख जनप्रतिनिधि की गाड़ी पर आगे की ओर मानक नंबर प्लेट के बजाय केवल 'विधायक' लिखी लाल तख्ती नजर आई, जबकि पीछे आरटीओ नियमों के विपरीत डिजाइनर अंदाज में नंबर लिखा हुआ पाया गया और कांच पर काली फिल्म (ब्लैक फिल्म) चढ़ी हुई थी। इसके अलावा, वन विभाग के DFO साहब की गाड़ी, PWD जबलपुर के अधिकारियों के वाहन, नगर परिषद के CMO तथा स्वास्थ्य विभाग (CMHO) से जुड़े वाहनों की नंबर प्लेट और उनके व्यावसायिक/प्राइवेट स्वरूप को लेकर भी चर्चाएं रहीं कि क्या ये वाहन तय प्रशासनिक और परिवहन मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। जब मीडिया द्वारा इस संबंध में मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने सवालों पर चुप्पी साध ली। हालांकि, इसी बीच कलेक्ट्रेट में मौजूद जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर और एसडीएम के वाहन पूरी तरह से मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का पालन करते हुए सुव्यवस्थित नजर आए।
मोटर व्हीकल एक्ट और नियम क्या कहते हैं? जानकारों और परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार सड़क पर चलने वाले हर वाहन के लिए कुछ कड़े प्रावधान तय किए गए हैं, जिनका उल्लंघन कानूनी रूप से दंडनीय है। केंद्रीय मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 50 के तहत हर वाहन पर आगे और पीछे स्पष्ट और निर्धारित मानक वाली HSRP होना अनिवार्य है। नंबर प्लेट को छिपाना, गायब रखना या उसकी जगह केवल पदनाम की तख्ती लगाना नियमों के विरुद्ध है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों और यातायात नियमों के अनुसार, किसी भी वाहन के कांच पर आफ्टर-मार्केट ब्लैक फिल्म (टिंटेड ग्लास) का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकारी या आधिकारिक कार्यों में उपयोग होने वाले वाहनों का पंजीयन और उनके परमिट पारदर्शी होने चाहिए। अनधिकृत या प्राइवेट नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का शासकीय बैठकों या दौरों में नियमित उपयोग प्रशासनिक और वित्तीय ऑडिट के दायरे में सवाल खड़े करता है।
जनता के बीच क्या है चर्चा और क्या है अपेक्षा? लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और बड़े प्रशासनिक अधिकारी समाज के लिए एक आदर्श होते हैं। आम नागरिक यातायात नियमों का पालन करें, इसके लिए प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चलाता है और सख्ती करता है। ऐसे में जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग या जनप्रतिनिधि ही अनजाने में या लापरवाही वश नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इससे समाज में गलत संदेश जाने की संभावना रहती है। स्थानीय नागरिकों और जागरूक वर्ग का मानना है कि कानून सबके लिए बराबर है। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित जिम्मेदार नुमाइंदे और अधिकारी स्वतः संज्ञान लेंगे तथा भविष्य में यातायात एवं परिवहन नियमों का शत-प्रतिशत पालन कर आम जनता के सामने एक सकारात्मक मिसाल पेश करेंगे।
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