डिंडोरी: जिले के करंजिया विकासखंड मुख्यालय स्थित मॉडल स्कूल से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के दावों की पोल खोलकर रख दी है। अन्य चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही खबरों से हटकर, जब इस पूरे प्रकरण के आंतरिक पहलुओं और जिम्मेदारों के बयानों की तह तक पड़ताल की गई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शिक्षा के पावन मंदिर में जहाँ विद्यार्थियों के हाथों में कलम, कॉपियाँ और कृषि विज्ञान की किताबें होनी चाहिए, वहाँ उन्हें गैंती, फावड़ा, सबल और बेलचा थमाकर सड़क पर मजदूरी जैसा कार्य कराया जा रहा है।
वायरल वीडियो के भीतर छिपी हकीकत और छात्रों के बयान
सामने आए इस वायरल वीडियो में मॉडल स्कूल के छात्र अपनी नियमित स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे हैं, जो अध्ययन कक्ष की बजाय सार्वजनिक मार्ग पर कड़े शारीरिक श्रम में जुटे हुए हैं। वीडियो की गहराई में जाने पर यह स्पष्ट होता है कि ये सभी छात्र कक्षा 11वीं और 12वीं के एग्रीकल्चर (कृषि विज्ञान) विषय के विद्यार्थी हैं। वीडियो में बातचीत के दौरान सबसे अहम और चौकाने वाली बात यह है कि वीडियो में छात्र स्पष्ट रूप से केशव तिवारी सर का नाम ले रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हें केशव तिवारी सर द्वारा ही स्कूल परिसर से जबरन उठाकर इस कार्य के लिए लाया गया था, जहाँ उनसे सार्वजनिक रास्ते पर बड़े-बड़े पत्थर व्यवस्थित करने और मार्ग से जुड़े श्रम कार्य कराए जा रहे थे।
जिला शिक्षा अधिकारी सुमन परस्ते का मौन और विभागीय लीपापोती??
इस पूरे प्रकरण में सबसे निराशाजनक और संदेहास्पद भूमिका जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सुमन परस्ते की रही है। जब मीडिया ने इस संवेदनशील मामले पर डीईओ सुमन परस्ते से कैमरे के सामने आधिकारिक पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का इस तरह मीडिया के सामने आने से कतराना कई प्रकार के गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, जब मामला सोशल मीडिया पर पूरी तरह तूल पकड़ गया और वीडियो ने हर तरफ तहलका मचा दिया, तब जाकर डीईओ कार्यालय हरकत में आया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया गया है।

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