डिंडौरी नगर में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित सीवेज परियोजना और तालाब सौंदर्यीकरण के कार्यों में सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 'सत्य प्रहार' न्यूज़ द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने और जमीनी तथ्यों के बाद, जिला प्रशासन एवं संयुक्त जांच समिति द्वारा की गई पड़ताल के आधार पर अब संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
'सत्य प्रहार' की रिपोर्ट और प्रशासनिक संज्ञान
डिंडौरी शहर में सीवर लाइन और जल संरक्षण से जुड़ी अमृत 2.0 योजना के क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। 'सत्य प्रहार' ने अपनी रिपोर्टों के माध्यम से इस बात को रेखांकित किया था कि किस प्रकार धरातल पर कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आ रही हैं। रिपोर्टों और जनहित से जुड़े इन तथ्यों के प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और एक संयुक्त जांच समिति का गठन कर मौके की बारिकी से जांच कराई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित पाई गईं।
जांच समिति के खुलासे और तकनीकी खामियां
कार्यालय कलेक्टर डिंडौरी के आदेशानुसार गठित संयुक्त जांच समिति (जिसमें अपर कलेक्टर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शामिल थे) द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, मौके पर कई गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि स्वीकृत डिजाइन के विपरीत सीवर लाइन, मेनहोल और पाइपलाइन का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा, कार्यस्थल पर आवश्यक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध न होने, गुणवत्ता परीक्षण में लापरवाही बरतने और बिना वैध एनओसी के निर्माण कार्य संचालित किए जाने जैसी बातें सामने आई हैं। इसके साथ ही, तालाब के कैचमेंट एरिया, नहर और वेस्ट वियर क्षेत्र में अवैध कब्जों की बात भी रिपोर्ट में आई है। सौंदर्यीकरण कार्यों के तहत लगभग 68 लाख रुपये की राशि खर्च किए जाने के मामले में बिना उचित सत्यापन और परीक्षण के भुगतान किए जाने से वित्तीय नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था संतोषजनक न होने के कारण अशुद्ध पानी की निकासी से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
नोटिस के दायरे में आने वाले संबंधित अधिकारी
प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रतिवेदन के आधार पर, शासकीय दायित्वों के निर्वहन में कथित लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर के सहायक परियोजना प्रबंधक अभय कुमार जैन, नगर परिषद डिंडौरी के उपयंत्री शिवराज बघेल, जल संसाधन विभाग डिंडौरी के उपयंत्री विहान शुक्ला, डिंडौरी के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमित तिवारी, हल्का नंबर 67 के पटवारी बलीराम भवेदी, राजस्व निरीक्षक हेमंत उईके, डिंडौरी के तत्कालीन तहसीलदार आर.पी. मार्को, जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा, म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर के उपयंत्री बलभद्र धुर्वे तथा परियोजना प्रबंधक गोपाल गुप्ता को 07 दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की आगामी कार्रवाई और विधिक स्थिति
जिला कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया द्वारा सभी संबंधित पक्षों को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 07 दिन का समय दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्राप्त न होने की स्थिति में नियमों के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। साथ ही, प्रकरण में वित्तीय अनियमितताएं पूरी तरह प्रमाणित पाए जाने की स्थिति में स्वतंत्र तृतीय पक्ष जांच, विशेष लेखा परीक्षण, भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत विधिक प्रक्रिया अपनाने तथा मामले को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और लोकायुक्त संगठन को प्रेषित किए जाने के निर्देश भी संस्तुति में शामिल हैं।
हमारी 4 अगस्त को दिखाई गई खबर को आप हमारे यूट्यूब चैनल और सत्य प्रहार न्यूज पर भी देख सकते हैं
https://www.satyaprahar.space/2026/08/EXPOSE.html
https://youtu.be/RyEyPfjui6A?si=eU0-c8gaQhEN9CEf
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पूरी तरह से कार्यालयीन जांच दस्तावेजों, प्रशासनिक प्रतिवेदनों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। 'सत्य प्रहार' का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या संस्था की व्यक्तिगत छवि को प्रभावित करना नहीं, बल्कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े तथ्यों को निष्पक्षता के साथ पाठकों के समक्ष रखना है।
0 टिप्पणियाँ