डिडौरी में बहा पुल: गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच कमेटी गठित


मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेनगुड़ा में बाढ़ के पानी में पुल के बह जाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर बेहद गंभीर हो गया है। सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई इस घटना की गूंज के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बजाग द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति पुल के निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता, भौतिक स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान की बारीकी से जांच करेगी और सात दिनों के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपेगी। डिंडौरी जिले में ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचनाओं की सुदृढ़ता को लेकर 'सत्य प्रहार' लगातार तथ्यात्मक और जमीनी रिपोर्टिंग करता रहा है, जिसके तहत इस बड़े प्रशासनिक कदम पर हमारी खास कवरेज।

मीडिया पर वायरल वीडियो और खबरों के बाद प्रशासन की सख्त कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत करंजिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम सेनगुड़ा में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण एक महत्वपूर्ण पुल अचानक तेज बहाव में बह गया। पुल के बह जाने से आसपास के ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस घटना के बाद स्थानीय रहवासियों और  मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर पुल के निर्माण में बरती गई कथित अनियमितताओं और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग को लेकर सवाल उठाए जाने लगे। जब यह मामला मीडिया के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचा, तो अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बजाग ने तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लिया और आदेश जारी करते हुए जांच के निर्देश दिए।

गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति और उसकी जिम्मेदारियां

सेनगुड़ा पुल के बहने के मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच के लिए प्रशासन ने तीन प्रमुख अधिकारियों की एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में जनपद पंचायत करंजिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शामिल किया गया है, जो प्रशासनिक और मैदानी समन्वय देखेंगे। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (मनरेगा) बजाग के सहायक यंत्री तथा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) बजाग के सहायक विकास अधिकारी को भी समिति का अहम हिस्सा बनाया गया है। इन तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे मौके का निरीक्षण करें, पुल के मूल प्राक्कलन यानी एस्टीमेट की जांच करें और यह पता लगाएं कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

सात दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाएगी विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गठित की गई यह तीनों अधिकारियों की संयुक्त टीम सेनगुड़ा पुल की भौतिक और तकनीकी स्थिति का आकलन करेगी। टीम यह जांच करेगी कि पुल का निर्माण किस योजना के तहत और किस एजेंसी द्वारा किया गया था तथा निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता कैसी थी। इसके अलावा, बाढ़ के पानी के कारण पुल को हुई क्षति के कारणों की भी तकनीकी समीक्षा की जाएगी। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी पहलुओं की गहराई से जांच करते हुए सात दिवस के भीतर अपनी विस्तृत और तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट संबंधित कार्यालय को उपलब्ध कराए। इस रिपोर्ट के आने के बाद दोषियों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों को प्रेषित की गई रिपोर्ट की प्रति

इस पूरे मामले की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए जांच समिति के गठन और आदेश की प्रतियां जिले के उच्च अधिकारियों को भी सादर सूचार्थ प्रेषित कर दी गई हैं। आदेश की प्रति कलेक्टर महोदय जिला डिंडौरी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत करंजिया को आवश्यक कार्रवाई एवं सूचार्थ भेजी गई है। 'सत्य प्रहार' इस पूरे मामले पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है और प्रशासनिक जांच के बाद सामने आने वाले हर एक सच को पाठकों तक प्रमुखता से पहुंचाता रहेगा। डिंडौरी जिले में जनता के पैसों से बनने वाले विकास कार्यों में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी यह investigative कवरेज आगे भी जारी रहेगी।

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