डिंडौरी जिले ने कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छुआ है, जिसने पूरे राज्य और देश में जिले का मान बढ़ाया है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के कुशल निर्देशन एवं उप संचालक कृषि श्री संजय दोषी के मार्गदर्शन में जिले में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का बहुत ही प्रभावी और समन्वित रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि डिंडौरी जिले ने देश के 100 चयनित जिलों में जुलाई माह के मध्य प्रथम रैंक हासिल की है, जो कि प्रशासन की कार्यकुशलता और दूरदर्शिता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह गौरवशाली उपलब्धि जिले के 11 विभागों द्वारा संचालित 36 योजनाओं के बेहतर समन्वय, उत्कृष्ट क्रियान्वयन और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के किसानों तक पूरी ईमानदारी से पहुँचाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। योजना के माध्यम से जिले में कृषि उत्पादकता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, सिंचाई और कृषि अधोसंरचना को मजबूती मिल रही है तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए अन्नदाताओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि एवं मिलेट उत्पादन को मिला नया आयाम
डिंडौरी जिले की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि, वनोपज और ग्रामीण आजीविका पर आधारित है, इसलिए यहाँ की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि और मिलेट उत्पादन को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ-साथ श्रीअन्न यानी मिलेट्स के उत्पादन को भी एक नया आयाम दिया जा रहा है। वर्तमान में जिले के लगभग 34 हजार 700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की पारंपरिक खेती की जा रही है, जिससे सीधे तौर पर 52 हजार 282 कृषक परिवार और 14 कृषक उत्पादक संगठन जुड़े हुए हैं। इन पारंपरिक कोदो-कुटकी उत्पादों को जीआई टैग मिलने से अब इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिल चुकी है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी मिलने लगा है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक 5 हजार 36 किसानों से 3 हजार क्विंटल कोदो-कुटकी की उपार्जन एवं खरीदी का कार्य पूरी तरह से सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जबकि चालू वर्ष में इसके लिए 10 हजार क्विंटल खरीदी का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के दायरे को और अधिक विस्तारित करने के उद्देश्य से डिंडौरी जिले में कुल 33 जैव संसाधन केंद्रों का निर्माण किया गया है, जिनके माध्यम से 67 हजार 155 लीटर वर्मी वॉश, जीवामृत एवं अग्न्यास्त्र का सफल उत्पादन किया गया है और इसका उपयोग लगभग 390 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में किया जा चुका है। जिले के 15 हजार 928 किसानों ने पूरी तरह से प्राकृतिक खेती को अपना लिया है, और लगभग 8 हजार 400 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र का जैविक प्रमाणीकरण भी पूरी तरह से पूर्ण किया जा चुका है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक बेहतरीन कदम है।
आधुनिक कृषि मशीनीकरण और तकनीकी सुदृढ़ीकरण
कृषि के क्षेत्र में आधुनिकता और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए मशीनीकरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले में हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे अत्याधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से लगभग 38 हजार 518 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में प्रभावी मशीनीकरण का कार्य किया गया है, जिससे किसानों का श्रम और समय दोनों की बचत हो रही है। डिंडौरी जिले के मेहनतकश किसानों को कुल 305 उन्नत कृषि यंत्रों का सुगम वितरण किया गया है, ताकि खेती का कार्य अधिक सुगम हो सके। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जुलाई माह तक प्राकृतिक एवं जैविक कृषि विकास योजना के अंतर्गत कुल 6 हजार 364 कृषकों का नया पंजीयन किया गया है। इसके साथ ही, एफपीओ सुदृढ़ीकरण के महत्वपूर्ण कार्य के अंतर्गत 4 हजार 615 नवीन कृषकों की लिंकिंग की गई है, लगभग 5 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण से जुड़ी हुई मजबूत अधोसंरचनाओं का निर्माण किया गया है तथा 678 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई कृषि यंत्रों का उपयोग पूरी तरह से सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा दलहन और तिलहन फसलों के क्षेत्र के विस्तार, किसान क्रेडिट कार्ड का शत-प्रतिशत लाभ, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती के प्रति रुझान बढ़ाने तथा कृषि विज्ञान केंद्र और एनआरएलएम के माध्यम से किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण देने जैसी तमाम गतिविधियाँ भी लगातार संचालित की जा रही हैं, जिससे कृषि व्यवस्था और अधिक मजबूत हो रही है।
पशुपालन एवं डेयरी विकास से सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था
केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन और डेयरी विकास के क्षेत्र में भी डिंडौरी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण के तहत चयनित 28 ग्रामों में कुल 72 विशेष शिविर आयोजित किए गए और शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसके बाद अब दूसरे चरण में नियमानुसार 144 नए ग्रामों का चयन भी किया जा चुका है। चारा बीज प्रदाय योजना के अंतर्गत जिले के 1 हजार 469 पशुपालकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण ज्वार चारा बीज का निःशुल्क व सुगम वितरण किया गया है, ताकि पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत 26 पशुपालकों को उन्नत मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसों का वितरण किया गया है, जिससे उनकी आय में सीधी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के माध्यम से डिंडौरी में डेयरी व्यवसाय को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पशुओं के स्वास्थ्य और उनके समय पर उपचार के मामले में वर्ष 2025-26 से लेकर अब तक जिले में कुल 3 लाख 94 हजार 667 पशुओं का बहुत ही प्रभावी उपचार किया गया है, और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत 4 लाख 7 हजार 800 टीके लगाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि एफएमडी टीकाकरण अभियान के मामले में डिंडौरी जिले ने पूरे जबलपुर संभाग में प्रथम स्थान प्राप्त करके एक मिसाल कायम की है।
सुशासन और प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट परिणाम
यह पूरी सफलता सुशासन और प्रशासनिक विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का ही परिणाम है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत प्राप्त होने वाली शिकायतों का तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण, सुशासन श्रेणी के अंतर्गत बेहतरीन कार्य, किसानों का नियमित प्रशिक्षण, फसल कटाई प्रयोग के लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति, प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं यानी पैक्स का संपूर्ण डिजिटलीकरण, पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से आसान ऋण वितरण, ग्रामीण कौशल योजना, आधार सीडिंग, राजस्व से जुड़े पुराने लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण, तथा उद्यानिकी एवं पशुपालन से जुड़ी तमाम गतिविधियों में डिंडौरी जिले का प्रदर्शन अन्य जिलों की तुलना में सर्वोत्कृष्ट रहा है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि के अवसर पर जिला प्रशासन ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के सफल क्रियान्वयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों और जिले के परिश्रमी व समर्पित किसानों को हार्दिक बधाई दी है और उनका आभार व्यक्त किया है। साथ ही, जिला प्रशासन की ओर से यह भी आह्वान किया गया है कि आने वाले समय में भी इसी प्रकार का प्रभावी विभागीय समन्वय, जनभागीदारी और लगातार सतत् निगरानी बनाए रखी जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों और ग्रामीण परिवारों को शासन की हर एक योजना का सीधा और पूरा लाभ मिल सके। सत्य प्रहार न्यूज़ की यह विशेष रिपोर्ट डिंडौरी जिले के विकास और प्रशासनिक उपलब्धियों को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखती है।

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