डिंडौरी। आज शनिवार की शाम जिला मुख्यालय के स्कूल मैदान के सामने एक ऐसा नज़ारा दिखा, जिसने हर राहगीर के कदम रोक दिए और बरसों पुरानी यादें ताज़ा कर दीं। दरअसल, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की सारंगढ़ तहसील अंतर्गत सिल्यारी गाँव से आए एक आदिवासी नट परिवार की मासूम बच्ची काजल ने यहाँ सड़क किनारे हवा में बंधी पतली रस्सी पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। लगभग आधे घंटे तक चले इस तमाशे के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब संतुलन बिगड़ने से बच्ची अचानक नीचे गिर गई, लेकिन उसने गजब के हौसले का परिचय दिया। वह बिना डरे तुरंत उठी, मुस्कुराई और दोबारा रस्सी पर चढ़कर अपने काम में जुट गई। इस अद्भुत कलाबाज़ी को देखकर शनिवार की शाम बाज़ार निकले लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसमें बच्चों ने इस पारंपरिक खेल का जमकर लुत्फ़ उठाया। स्थानीय नागरिकों ने भी सहृदयता दिखाते हुए दिल खोलकर बच्ची को नकद इनाम दिया और उसके परिवार का उत्साहवर्धन किया।
इस कलाबाज़ी के पीछे छिपे हालातों को खंगालने पर इस आदिवासी नट परिवार का एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक पहलू भी सामने आया। बच्ची काजल के साथ घूम-घूमकर पेट पाल रहे उसके भाई रामा और भाभी निशा ने चर्चा में बताया कि कभी उनके पास आजीविका के लिए एक एकड़ खेती की जमीन थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान लगे गंभीर आर्थिक झटकों और साहूकार के कर्ज़ के जाल के कारण वह जमीन उनके हाथ से निकल गई। ज़मीन छिनने के बाद घर की माली हालत इस कदर बिगड़ी कि बच्चों की पढ़ाई हमेशा के लिए छूट गई और अब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए यह सड़क ही उनका ठिकाना बन चुकी है। परिवार की भाभी निशा ने बताया कि वह खुद भी बचपन में यही पारंपरिक करतब करती थीं और उन्होंने ही भाई रामा के साथ मिलकर छोटी सी काजल को इस हुनर में पारंगत किया है। आज मुफ़लिसी के इस दौर में इस आदिवासी नट परिवार के लिए पूर्वजों से मिला यह हुनर ही ज़िंदगी की गाड़ी खींचने का एकमात्र सहारा बना हुआ है।
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