नेशनल लोक अदालत: 673 प्रकरणों का हुआ निराकरण, 1.46 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित

 

नेशनल लोक अदालत: 673 प्रकरणों का हुआ निराकरण, 1.46 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित

डिंडौरी, 12 सितंबर 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिंडौरी श्रीमती शशिकांता वैश्य के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय डिंडौरी, कुटुम्ब न्यायालय डिंडौरी और सिविल न्यायालय शहपुरा में नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत के दौरान आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से विभिन्न लंबित मामलों का त्वरित और सुगम समाधान किया गया, जिससे वर्षों पुराने विवादों का भी अंत हुआ।

लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर में मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री एम.एल. राठौर और प्रथम जिला न्यायाधीश श्री डी.एस. मंडलोई ने कार्यक्रम का आरंभ किया। इस अवसर पर श्री एम.एल. राठौर ने अपने संबोधन में बताया कि लोक अदालत आपसी सहमति और सुलह के जरिए न्याय पाने और विवादों के त्वरित निस्तारण का सबसे प्रभावी मंच है।

इस विशेष आयोजन में न्यायालयों में लंबित पारिवारिक विवाद, मोटरयान दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक बाउंस या अनादरण के मामले, और विभिन्न राजीनामा योग्य आपराधिक तथा दीवानी प्रकरणों को आपसी समझौते के आधार पर सुलझाया गया। इसके अतिरिक्त, बैंकों की ऋण वसूली, बिजली और टेलीफोन बिल के बकाया भुगतान, तथा नगर पालिका के संपत्ति एवं जल कर से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों का भी पक्षकारों की आपसी सहमति से समाधान किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिंडौरी की न्यायाधीश एवं सचिव श्रीमती मुग्धा कुमार ने जानकारी दी कि लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित कुल 373 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया, जिनमें 1 करोड़ 24 लाख 24 हजार 595 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए। इसके साथ ही, प्री-लिटिगेशन श्रेणी के तहत 300 मामलों का निपटारा किया गया, जिससे संबंधित विभागों को 22 लाख 67 हजार 855 रुपये प्राप्त हुए। इस प्रकार नेशनल लोक अदालत में कुल 673 मामलों का निराकरण करते हुए 1 करोड़ 46 लाख 92 हजार 450 रुपये के कुल अवार्ड पारित किए गए।

समझौते से जुड़े टूटे परिवार और सुलझे पुराने विवाद

यह नेशनल लोक अदालत केवल कानूनी मामलों के निपटारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने मानवीय दृष्टिकोण से कई परिवारों को टूटने से बचाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। कुटुम्ब न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश श्री एम.एल. राठौर की विशेष समझाइश के बाद एक पति, अपनी 12 वर्षों से विवाहित पत्नी और दो बच्चों के साथ खुशी-खुशी वापस घर लौटे, जिससे उजड़ता हुआ परिवार पुनः एकजुट हो गया। इसी प्रकार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती कमला उईके के प्रयासों से वर्ष 2015 से अलग रह रहे एक अन्य दंपती के बीच चल रहे पुराने वैवाहिक विवाद का भी सकारात्मक समाधान कराया गया।

डिंडौरी न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री अतुल श्रीवास्तव और शहपुरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री कर्नल सिंह श्याम के न्यायालयों में भी आपसी राजीनामे के माध्यम से भाई-भाई और भाई-बहन के बीच चल रहे पुराने पारिवारिक विवादों का अंत किया गया। इन फैसलों से न केवल अदालती मुकदमों का बोझ कम हुआ, बल्कि वर्षों से रिश्तों में आई दूरियां भी हमेशा के लिए समाप्त हो गईं।

इस गरिमामयी आयोजन में द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री शिवकुमार कौशल, तृतीय जिला न्यायाधीश श्री रविंद्र गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री गिरजेश कुमार सनौडिया, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती कमला उईके, श्री आर.पी. सिंह, श्री अतुल श्रीवास्तव, श्रीमती रिया डेहरिया, सुश्री अदिति सनौडिया, और जिला विधिक सहायता अधिकारी श्रीमती दीपिका तारन उपस्थित रहे। साथ ही एडीएम श्री जे.पी. यादव, एसडीओपी श्री सतीश द्विवेदी, एएसपी श्रीमती रेखा सिंह, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री यू.के. पटेरिया, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री भीम प्रकाश रामटेके सहित डिफेंस काउंसिल टीम, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, अधिवक्तागण और बड़ी संख्या में आम नागरिक व पक्षकार मौजूद रहे।

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