
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के अंतर्गत विकासखंड शहपुरा के ग्राम गुतलवाह में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक भव्य कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के कुशल मार्गदर्शन में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ग्रामीणों और पशुपालकों को विभिन्न विभागीय योजनाओं व पशु स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई. उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. आर.एम. भूरमुदे ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के लाभार्थी श्री धनिराम साहू तथा मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के लाभार्थी श्री जागेश झारिया एवं श्री अनिरुद्ध गवले के निवास पर पहुंचकर उनके पशुपालन व्यवसाय का प्रत्यक्ष जायजा लिया. इस दौरान पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित आहार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवा और पशुओं के रखरखाव से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां भी सिखाई गईं.
अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने पशु औषधालय गुतलवाह, पशु औषधालय अमरा और पशु चिकित्सालय शहपुरा का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं की कड़ी समीक्षा की. निरीक्षण के दौरान पशु औषधालय गुतलवाह में अतिरिक्त प्रभार पर कार्यरत एवीएफओ को निर्धारित दिवसों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर लक्ष्यों को पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए, साथ ही दवाओं के रखरखाव में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. कार्यक्रम स्थल पर विभाग की ओर से विशेष स्टॉल लगाए गए, जहाँ 10 पशुपालकों को केसीसी, 4 को बकरी पालन तथा 2 पशुपालकों को आचार्य विद्यासागर डेयरी पालन योजना की जानकारी देकर आवेदन प्रक्रिया समझाई गई. इसके अलावा आयोजित औषधि वितरण शिविर में 116 पशुपालकों को कृमिनाशक, क्लिनिंग और पाचन संबंधी दवाएं बांटी गईं तथा 179 पशुओं का एचएस टीकाकरण किया गया, साथ ही आपातकालीन स्थिति के लिए 1962 चलित पशु चिकित्सा इकाई की सुविधा से भी सभी को अवगत कराया गया.
कार्यक्रम में यशस्वी संवाद के जरिए ग्रामीण जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत ग्राम मरवारी की सुश्री हिमांशी एवं श्रीमती पुष्पलता झारिया सहित अन्य हितग्राहियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक समाधान कराया गया. उद्यम संवाद के दौरान स्थानीय पशुपालकों ने खुशी जताते हुए बताया कि हरियाणा नस्ल की मुर्रा भैंस से उन्हें प्रतिदिन लगभग 10 लीटर दूध का उत्पादन मिल रहा है, जिससे उन्हें हर दिन करीब 1,000 से 2,000 रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है. विभाग द्वारा पहले उपलब्ध कराए गए चारा बीज के उपयोग से आज पशुपालकों के पास अपने मवेशियों के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा चारा भी उपलब्ध है, जो ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है.
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