जिले के बेशकीमती साल (सरई) के जंगलों को साल बोरर कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज गुरुवार को एक महत्वपूर्ण और बड़ी कार्रवाई पूरी की गई है। इस अभियान के तहत करंजिया, जगतपुर, कबीर, चौरादादर,खारिडीह, ठाडपथरा, गोपालपुर और कन्हारी जैसे विभिन्न संग्रहण केंद्रों पर ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए कुल 19,25,118 साल बोरर कीटों का विधिवत दहन कर विनिष्टिकरण किया गया।
यह संपूर्ण कार्रवाई 3 डीएफओ (मंडला उत्पादन , डिंडोरी उत्पादन और डिंडोरी सामान्य), 2 प्रशिक्षु आईएफएस (IFS) अधिकारियों तथा 3 एसडीओ (SDO) के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन, सानिध्य व निगरानी में पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से बजाग, पश्चिम करंजिया और समनापुर का कुछ हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
एसडीओ श्री सुरेंद्र जाटव (सामान्य वन मंडल)
"ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए कुल 19,25,118 साल बोरर कीटों का विधिवत दहन कर विनिष्टिकरण किया गया और एवज में प्रति कीट 2 रुपये की निर्धारित दर से गणना करते हुए कुल 38,50,236 रुपये (अड़तीस लाख पचास हजार दो सौ छत्तीस रुपये) की राशि ग्रामीणों के खातों में अंतरित (भुगतान) की गई है। विभाग द्वारा कुल 1,46,784 पेड़ों की कटाई और सुरक्षा के लिए चिह्नांकन (मार्किंग) का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य विभाग की ओर से मार्किंग और कीटों के विनिष्टिकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, और अब आगे की कटाई का कार्य उत्पादन विभाग द्वारा किया जाएगा।"
श्रीमती भारती ठाकरे (IFS) डीएफओ उत्पादन
सामान्य विभाग से मार्किंग का कार्य पूरा होने के बाद, भारत सरकार से पेड़ों की कटाई की आधिकारिक अनुमति प्राप्त हो चुकी है, जिसके बाद उत्पादन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि कटाई और वानिकी कार्यों में लगे स्थानीय ग्रामीणों को (Man-days) के हिसाब से पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है। जिन स्थानों पर चिह्नांकन के बाद पेड़ों की संख्या अधिक है, वहाँ भंडारण के लिए कूप (Coupe) बनाए गए हैं। वर्तमान में खराब मौसम और बारिश के कारण कटाई में कुछ बाधा आ रही है, लेकिन मौसम साफ होते ही कार्य में तेजी लाई जाएगी। कटाई के पश्चात प्राप्त होने वाली इन लकड़ियों का पारदर्शिता के साथ ई-ऑक्शन (E-auction) के जरिए विक्रय किया जाएगा।
0 टिप्पणियाँ