सोशल मीडिया की मस्ती कहीं पड़ न जाए भारी: 1980 के रेट्रो ट्रेंड्स और डीपफेक, ब्लैकमेल और पहचान की चोरी का बड़ा खतरा

 

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AI जनित तस्वीरें ला रहीं डीपफेक, ब्लैकमेल और पहचान की चोरी का बड़ा खतरा: साइबर एक्सपर्ट्स की सख्त चेतावनी

एआई ट्रेंड्स बन रहे हैं गंभीर साइबर खतरा

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रेट्रो और ट्रेंड-बेस्ड तस्वीरें अपलोड करने का बढ़ता क्रेज अब एक गंभीर साइबर सुरक्षा खतरा बनता जा रहा है। साइबर एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है कि नागरिकों द्वारा अपलोड की जाने वाली निजी तस्वीरों का इस्तेमाल असामाजिक तत्व अशील और आपत्तिजनक सामग्री बनाने के लिए कर रहे हैं। अनवरिफाइड ऐप्स और वेबसाइट्स पर चलने वाले ये फन ट्रेंड्स अनजाने में ही लोगों को डीपफेक, ब्लैकमेल, पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) और वित्तीय धोखाधड़ी के जाल में धकेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अब केवल सोशल मीडिया से पुरानी तस्वीरें चुराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसानी से उपलब्ध एआई टूल्स का उपयोग करके तस्वीरों और वीडियो में हेरफेर कर रहे हैं।

सामने आए कई गंभीर और चौंकाने वाले मामले

मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए हालिया मामलों ने इस डिजिटल खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है। भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक युवक ने कथित तौर पर शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल कर एक युवती की तस्वीर से आपत्तिजनक छवि तैयार की। इसी तरह निशातपुरा में एक अन्य घटना के तहत, पारिवारिक विवाद के बाद एक महिला ने अपने होने वाले पति की मां और बहन की फर्जी आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने के लिए एआई टूल्स का दुरुपयोग किया। इसके अलावा अनूपपुर और भोपाल जिलों से भी नाबालिगों और रूममेट्स से जुड़े ऐसे मामले सामने आए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि आम अपराधियों तक भी एआई तकनीक कितनी आसानी से पहुंच चुकी है।

अनजान ऐप्स और छुपे हुए पेमेंट ट्रैप्स का जाल

साइबर पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे अनजान एआई ऐप्स और वेबसाइट्स पर अपनी स्पष्ट, हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें अपलोड करने से बचें। इनमें से कई थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स अपनी प्राइवेसी पॉलिसी स्पष्ट नहीं करते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं को यह पता नहीं चल पाता कि उनका डेटा कितने समय तक सुरक्षित रहेगा, कौन उस तक पहुंच बना सकता है या उसका इस्तेमाल कहां किया जाएगा। कई साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि कई फ्री एआई एप्लीकेशन एक बड़े वित्तीय जाल की तरह काम करती हैं। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं को ट्रायल के नाम पर लुभाती हैं और बिना नियम व शर्तें पढ़े पेमेंट विवरण दर्ज करने पर चुपचाप ऑटो-पेमेंट सब्सक्रिप्शन एक्टिवेट कर लेती हैं।

नागरिकों के लिए जरूरी और अहम साइबर सुरक्षा टिप्स

डिजिटल युग में अपनी व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा करने और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि कभी भी अपनी या परिवार की तस्वीरें किसी अनजान, अनवरिफाइड एआई एप्लीकेशन और वेबसाइट पर अपलोड न करें। उपयोगकर्ताओं को उच्च-रिजॉल्यूशन या संवेदनशील तस्वीरें बेवजह शेयर करने से बचना चाहिए, किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर, परमिशंस और यूजर रिव्यूज की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। साथ ही, आधार, पैन, मोबाइल नंबर, ईमेल या बैंक विवरण जैसी गोपनीय जानकारियां अनावश्यक रूप से साझा न करें और सब्सक्रिप्शन की शर्तों को ध्यान से पढ़ने के साथ अपने मोबाइल फोन पर अनचाहे ऑटो-पेमेंट सेटिंग्स को तुरंत डिसेबल कर दें।

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