डिंडोरी: शासकीय सरई स्कूल में नियमों को ताक पर रखकर अतिथि शिक्षक की नियुक्ति,प्राचार्य चंद्रभान बनवासी पर फर्जी हस्ताक्षर व मनमानी के गंभीर आरोप



मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरई में शिक्षा विभाग के नियमों, प्रशासनिक निर्देशों और छात्रहितों को ताक पर रखकर एक अयोग्य व्यक्ति को अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे गंभीर घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र के पालकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अब स्थानीय स्तर पर आवाज मुखर होने लगी है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला और शिकायती पत्र के गंभीर बिंदु

सामने आए आधिकारिक शिकायती दस्तावेजों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरई में संबंधित विषय के लिए नियमित शिक्षक की पदपूर्ति शासन स्तर से पहले ही की जा चुकी है। इसके बावजूद संस्थान के प्रभारी प्राचार्य चंद्रभान बनवासी पर यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए और स्वेच्छाचारिता का परिचय देते हुए मुकेश खांडे को संस्था में अवैध व अनाधिकृत रूप से प्रवेश दिला दिया।

शिकायत पत्र में यह मुख्य रूप से उजागर किया गया है कि इस फर्जी नियुक्ति को कानूनी जामा पहनाने और वैध साबित करने के लिए विद्यालय में एक पालक-शिक्षक संघ की बैठक का स्वांग रचा गया। आरोप है कि इस बैठक में बिना सहमति के पालकों के फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि और वास्तविक पालक इस प्रस्ताव के पूरी तरह खिलाफ और असहमत थे। ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि आरोपी बनाए गए मुकेश खांडे के पास कृषि संकाय से जुड़ी हुई कोई भी अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और वैध स्कोरकार्ड तक नहीं है। इसके बावजूद, प्रभारी प्राचार्य द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य को सीधे तौर पर अंधकार में धकेला जा रहा है।

पालक जगदीश्वर चंदेल का छलका दर्द और पूर्व शिकायतें

इस पूरे मामले को लेकर विद्यालय में अध्ययनरत एक छात्र के पिता और स्थानीय ग्रामीण जगदीश्वर चंदेल ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी पीड़ा और रोष व्यक्त किया है। जगदीश्वर चंदेल ने बताया कि उनका बच्चा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरई में कक्षा दसवीं में अध्ययन कर रहा है। उन्होंने बताया कि विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य द्वारा उन्हें और अन्य पालकों को बैठक के नाम पर बुलाया गया था, जहाँ गुप्त रूप से प्रस्ताव तैयार कर फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कराए गए।

जगदीश्वर चंदेल ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इस मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ करीब तीन-चार महीने पहले जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर की जनसुनवाई में भी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा, उन्होंने विद्यालय के प्रिंसिपल (प्रभारी प्राचार्य) चंद्रभान बनवासी को मौखिक रूप से भी यह स्पष्ट रूप से चेताया था कि संबंधित व्यक्ति के पास न तो विषय की पात्रता है और न ही स्कोरकार्ड है, इसलिए छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए उन्हें स्कूल में न रखा जाए। परंतु इसके बावजूद जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और कोई भी ठोस प्रशासनिक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

सत्ता पक्ष के प्रभाव और दखलंदाजी पर विधायक ओमकार सिंह मरकाम का तीखा हमला

इस पूरे प्रकरण ने अब तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। स्थानीय Congress विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि वर्तमान समय में सरकारी संस्थानों और विद्यालयों जैसे पवित्र मंदिरों में सत्ता पक्ष के लोग और उनके चहेते अपनी धौंस जमाकर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति से लेकर अन्य प्रशासनिक मामलों में हर जगह सत्ता पक्ष के लोगों का अनावश्यक दखل सामने आ रहा है, जो कि पूरी तरह से अनुचित और गैरकानूनी है। जनता ने आम नागरिकों को अधिकार दिए हैं और शासन-प्रशासन जनता की सेवा के लिए है, न कि सत्ता के बल पर मनमानी करने के लिए। विधायक ने जोर देकर कहा कि कई मामलों में यह भी सामने आ रहा है कि व्यक्ति पात्र नहीं है, फिर भी सत्ता पक्ष के भारी दबाव के चलते इस तरह के घिनौने कृत्य और घटनाएं हो रही हैं। यह पूरी तरह से गलत है और इस मामले में बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष न्याय होना चाहिए। जो भी उम्मीदवार वास्तव में पात्र और योग्य है, केवल उसी को अवसर मिलना चाहिए।

प्रभारी प्राचार्य की चुप्पी और असहयोग रवैया

इस पूरी खबर की सत्यता की तह तक जाने के लिए और मीडिया की निष्पक्ष पत्रकारिता के तहत जब हमारी टीम ने आरोपी प्रभारी प्राचार्य चंद्रभान बनवासी से उनका आधिकारिक पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का कड़ा प्रयास किया, तो उनकी ओर से बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला। प्रभारी प्राचार्य चंद्रभान बनवासी ने हमारा फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा और हमारे द्वारा भेजे गए किसी भी मैसेज या व्हाट्सएप टेक्स्ट का कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। उनकी यह लंबी चुप्पी और संवाद से दूरी इन सभी गंभीर आरोपों को और अधिक पुख्ता और संदिग्ध बनाती है।

सहायक आयुक्त (AC Tribal) राजेंद्र जाटव का बयान

जब इस पूरे सनसनीखेज भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले को जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त (AC Tribal) राजेंद्र जाटव के संज्ञान में लाया गया और उनके सामने रखा गया, तो उन्होंने कैमरे के सामने औपचारिक बयान देने से तो परहेज किया। हालांकि, उन्होंने बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से यह जरूर आश्वासन दिया कि वे इस पूरे प्रकरण की अपने स्तर पर बारीकी से निष्पक्ष जांच करवाएंगे। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी तथ्य और दस्तावेज सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमों के तहत जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त से सख्त उचित कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष और आगे की सुगबुगाहट

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासनिक जांच के बाद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर फाइलों के बस्ते में यह मामला दबा दिया जाएगा। पालकों की चेतावनी और जनप्रतिनिधियों के कड़े रुख के बाद अब क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फर्जी हस्ताक्षर करने वाले और बिना योग्यता के शिक्षक थोपने वाले प्रभारी प्राचार्य पर कब गाज गिरती है।

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