डिंडौरी: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में प्रशासनिक कसावट और पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से सख्त नजर आ रहा है। राजस्व कार्यों के निष्पादन में कोताही, उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले मैदानी अमले पर कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने कड़ा शिकंजा कसा है। निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही दिखाने और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत न करने पर 9 राजस्व अधिकारी-कर्मचारियों की एक वार्षिक वेतनवृद्धि (असंचयी प्रभाव से) रोकने के कड़े आदेश जारी किए गए हैं। इस प्रशासनिक कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
समीक्षा बैठक में सामने आई थी राजस्व कार्यों की सुस्ती
गत 17 जुलाई 2026 को जिला मुख्यालय पर राजस्व अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और महत्वपूर्ण राजस्व कार्यों की प्रगति की गहराई से समीक्षा की गई। समीक्षा किए गए प्रमुख बिंदुओं में निम्नलिखित शामिल थे:
ई-रजिस्ट्रेशन (E-Registration) के कार्य और उनकी अद्यतन स्थिति।
आधार आरओआर (ROR) सीडिंग और शत-प्रतिशत प्रविष्टि।
भूमि सीमांकन के लंबित मामलों का समय-सीमा में निपटारा।
विभिन्न राजस्व दस्तावेजों और पोर्टलों पर दर्ज डेटा की गुणवत्ता।
समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई क्षेत्रों में कार्यों की गति बेहद धीमी है और अपेक्षित प्रगति नहीं मिल रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही, लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने, अपने दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करने और स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
कारण बताओ नोटिस और संतोषजनक जवाब का अभाव
समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में, जिला कार्यालय द्वारा 22 जुलाई 2026 को संबंधित लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से उनसे पूछा गया कि निर्धारित कार्यों में प्रगति क्यों नहीं लाई गई और क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
निर्धारित समयावधि के भीतर संबंधित अमले की तरफ से जो स्पष्टीकरण या जवाब प्रस्तुत किए गए, वे प्रशासनिक रूप से संतोषजनक नहीं पाए गए। उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और पदीय कर्तव्यों के प्रति इस उदासीनता को देखते हुए, प्रशासन ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1965 के नियम-10 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अंतिम निर्णय लिया। इसके तहत सभी 9 कर्मियों की एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
कार्रवाई की जद में आए ये राजस्व अधिकारी-कर्मचारी
जिला प्रशासन द्वारा की गई इस बड़ी और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में कुल 9 मैदानी राजस्व कर्मी आए हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:
श्री राजेन्द्र मरकाम (राजस्व निरीक्षक)
श्री हेमंत उईके (राजस्व निरीक्षक)
श्री संजय मरकाम (राजस्व निरीक्षक)
श्री सुखदेव सिंह भवेदी (राजस्व निरीक्षक)
श्री बलसिंह बल्को (राजस्व निरीक्षक)
श्री तीरथ प्रसाद संत (राजस्व निरीक्षक)
श्री संजय परस्ते (पटवारी)
श्री शैलेन्द्र मार्को (पटवारी)
श्री विजय नेताम (पटवारी)
इन सभी कर्मियों पर अपने कार्यक्षेत्र में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में रुचि न लेने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने के आरोप सिद्ध पाए गए हैं।
कलेक्टर की दो टूक: शासकीय कार्यों में शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने जिले के समस्त प्रशासनिक और मैदानी अमले को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही, उदासीनता एवं निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की शिथिलता को बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे राजस्व से जुड़े सभी मामलों, जनहित की शिकायतों और पोर्टलों पर दर्ज होने वाले कार्यों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें। प्रशासन के इस रुख से यह साफ है कि आम जनता से जुड़े कार्यों में देरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, जिससे भविष्य में मैदानी स्तर पर कामकाज में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।
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