डिंडौरी/बजाग: नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा चयनित आकांक्षी विकासखंड बजाग में विकास की गति को और तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जनपद पंचायत सभागार बजाग में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत डिंडौरी, श्री दिव्यांशु चौधरी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों में तेजी से सुधार लाना रहा।
बैठक में प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जिला योजना अधिकारी एवं संयुक्त कलेक्टर सुश्री भारती मेरावी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बजाग श्री सचिन अग्रवाल, जिला योजना कार्यालय से अभिषेक बंसल और नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक फेलो डॉ. विकास जैन विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और आजीविका मिशन सहित सभी विभागों के विकासखंड स्तर के अधिकारी, संकुल प्राचार्य और पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहे।
38 संकेतकों की बिंदुवार समीक्षा और कार्ययोजना
बैठक के दौरान नीति आयोग के आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित सभी 38 संकेतकों की गहन बिंदुवार समीक्षा की गई। इसमें उन बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई जिनमें प्रगति बेहतरीन रही है और साथ ही उन क्षेत्रों की भी पहचान की गई जहाँ सुधार की गुंजाइश है।
सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि आकांक्षी विकासखंड बजाग शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता को बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा। सभी कार्य तय समय-सीमा और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे होने चाहिए। इतना ही नहीं, बैठक से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कड़े निर्देश भी दिए गए।
स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के लिए विशेष निर्देश
क्षेत्र के नागरिकों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए अधिकारियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए:
गर्भवती महिलाओं की देखभाल: आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से लगातार संपर्क बनाए रखने और उनके पोषण आहार की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया।
कुपोषण और जोखिम प्रबंधन: लो बर्थ वेट (कम वजन वाले) शिशुओं की संख्या को कम करने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान समय पर सुनिश्चित की जाए।
टीबी और कुपोषण नियंत्रण: टीबी रोगियों का सक्रिय रूप से पता लगाकर उन्हें निक्षय पोषण किट दी जाए और नियमित फॉलोअप रखा जाए। इसके अलावा, एसएएम (SAM) और मैम (MAM) श्रेणी के कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया जाए।
स्वास्थ्य शिविर: सभी शासकीय कार्यालयों में विभागवार रोस्टर तैयार कर कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएं।
शिक्षा के स्तर में सुधार और विशेष कक्षाएं
शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए बीआरसी और संकुल प्राचार्यों को कड़े निर्देश दिए गए कि वे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का सटीक आंकलन कर उसका प्रस्ताव जल्द भेजें। इसके साथ ही:
दिव्यांग विद्यार्थियों की सहायता के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।
10वीं और 12वीं बोर्ड कक्षाओं के परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।
जिन विद्यार्थियों के पिछले शैक्षणिक सत्र में 60 प्रतिशत से कम अंक आए हैं, उनकी सूची अलग से तैयार कर उनके लिए नियमित रेमेडियल क्लासेज (सुधार कक्षाएं) चलाई जाएं।
अन्य विभागों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
बैठक के अंत में अन्य सभी संबंधित विभागों के कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित निर्देश दिए गए:
जल एवं भंडारण: हर घर नल-जल योजना का सुचारू क्रियान्वयन किया जाए तथा बारिश के मौसम में अनाज के सुरक्षित भंडारण और उसे फंगस से बचाने के पुख्ता इंतजाम हों।
आजीविका और पंजीकरण: आजीविका मिशन के तहत अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। पंचायत सचिव अपनी आईडी के माध्यम से जन्म और मृत्यु पंजीयन का समय पर अनुमोदन करना सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य एवं पशुपालन: मलेरिया संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां साफ-सफाई और स्वच्छता के उपाय किए जाएं। यदि एफएमडी वैक्सीनेशन का कार्य पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पा रहा है, तो उसे ऑफलाइन माध्यम से शत-प्रतिशत पूरा किया जाए।

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