डिंडौरी: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में उच्च शिक्षा के संस्थानों और महाविद्यालयों में पसरी बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले छात्र-छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से एक विशाल रैली निकाली। यह रैली रानी अवंती बाई चौक से शुरू होकर कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंची, जहां छात्रों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों की आवाज बुलंद की। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार को 17 सूत्रीय मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की गई है।
महाविद्यालयों में बदहाल व्यवस्थाएं और छात्रों की मुख्य मांगें
डिंडौरी जिले के शासकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। एबीवीपी द्वारा सौंपे गए 17 सूत्रीय ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया गया है:
पेयजल और स्वच्छता: महाविद्यालय परिसरों में विद्यार्थियों के लिए शुद्ध और ठंडे पेयजल की उचित व्यवस्था करने तथा साफ-सुथरे शौचालयों का निर्माण व नियमित सफाई सुनिश्चित करने की मांग।
कक्षाओं में आधारभूत सुविधाएं: अध्ययन कक्षों (क्लासरूम) में पर्याप्त रोशनी, हवा के लिए काम करने वाले पंखे और सुचारू विद्युत आपूर्ति बहाल करना।
शैक्षणिक संसाधन: महाविद्यालयों के पुस्तकालयों (लाइब्रेरी) में पाठ्यक्रम से जुड़ी पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध कराने और विज्ञान प्रयोगशालाओं (लैब) को आधुनिक उपकरणों से लैस करने की मांग।
सुरक्षा और तकनीक: परिसरों की सुरक्षा के मद्देनजर मुख्य द्वारों और गलियारों में सीसीटीवी कैमरे लगवाना, परिसर में व्यवस्थित पार्किंग जोन बनाना और विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराना।
खेलकूद गतिविधियां: छात्र-छात्राओं के शारीरिक विकास के लिए खेल मैदान को दुरुस्त करने और खेल सामग्रियां उपलब्ध कराने की मांग।
प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम: पूरी न हुईं मांगें तो होगी भूख-हड़ताल
छात्र नेताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित विभागों और प्रशासन द्वारा आगामी एक महीने के भीतर सभी 17 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई करते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की जाती हैं, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में छात्र कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
निर्धारित समय-सीमा में मांगें पूरी न होने पर छात्र संघ ने उग्र आंदोलन करते हुए क्रमिक या आमरण भूख-हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस छात्र आक्रोश के समाधान के लिए कितनी जल्दी जमीनी स्तर पर कदम उठाता है।

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