जबलपुर नगर निगम के संभाग क्रमांक 6 में भर्राशाही का आलम: पानी, सफाई और लाइट व्यवस्था ठप, ज़िम्मेदार मौन

 


विशेष संवाददाता की रिपोर्ट

जबलपुर। संस्कारधानी के नगर निगम संभागीय कार्यालय दमोह नाका के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 6, राम मनोहर लोहिया त्रिमूर्ति नगर की 90 क्वार्टर कॉलोनी में इन दिनों मूलभूत सुविधाओं का संकट गहरा गया है। स्थानीय नागरिकों को पेयजल आपूर्ति, प्रकाश और सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महापौर और नगर निगम कमिश्नर द्वारा पेयजल और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के संबंध में संभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को लगातार कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत बनी हुई है। निगम के मैदानी कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, जिसके कारण नगर निगम की कल्याणकारी योजनाएं और समीक्षा चौपाल वार्डों के जरूरतमंद नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

इस गंभीर अव्यवस्था का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष उदाहरण 90 क्वार्टर स्थित दुर्गा मंदिर मैदान में लगी सार्वजनिक बोरिंग है। यह बोरिंग सामान्य दिनों के साथ-साथ जल संकट के समय भी पूरी कॉलोनी की प्यास बुझाने का मुख्य जरिया रही है, लेकिन पिछले छह महीनों से उचित मेंटेनेंस न होने के कारण यह पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव में इस बोरिंग से पानी का प्रेशर इतना कम हो गया है कि इसका लाभ पूरी कॉलोनी को मिलने के बजाय केवल चार-पांच घरों तक ही सीमित रह गया है, जबकि कॉलोनी के बाकी निवासी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि महज मुट्ठी भर घरों को पानी देने वाली इस बेहद कमजोर व्यवस्था के लिए नगर निगम हर साल बिजली के भारी-भरकम बिल और लाखों रुपये के मेंटेनेंस का भुगतान सरकारी खजाने से कर रहा है, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस गंभीर पेयजल संकट और मेंटेनेंस के नाम पर हो रही लापरवाही की लिखित व मौखिक शिकायतें कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से की जा चुकी हैं। इस मामले में खुद नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार और जल विभाग के अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए शिकायतें सौंपी गईं, लेकिन इसके बावजूद अब तक धरातल पर कोई सख्त या सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों की इस कथित उदासीनता के कारण संभागीय कार्यालय के अधीनस्थ कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि जनहित से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर निगम प्रशासन कब नींद से जागता है और लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।


नोट (डिस्क्लेमर): यह रिपोर्ट हमारे स्थानीय संवाददाता द्वारा दी गई जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों पर आधारित है। सत्य प्रहार समाचार का उद्देश्य जनहित में समस्याओं को उठाना है, किसी की छवि को ठेस पहुँचाना नहीं। खबर में शामिल कथनों व आरोपों की पुष्टि स्थानीय सूत्रों के माध्यम से की गई है, जिसके लिए चैनल वैधानिक रूप से ज़िम्मेदार नहीं है। सभी पक्षों के बयान सादर आमंत्रित हैं।

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