शुक्रवार को वन परिक्षेत्र डिंडौरी (सामान्य ) के कर्मचारियों ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री ओमप्रकाश धुर्वे से मुलाकात की और उन्हें अपना ज्ञापन सौंपा। दरअसल, साल 1998 से 2008 के बीच भर्ती हुए वनरक्षक से लेकर डिप्टी रेंजर स्तर के करीब 75 से ज्यादा कर्मचारी पिछले 10 साल से अपने प्रमोशन की राह देख रहे थे, लेकिन जब विभाग की ओर से बहुप्रतीक्षित सूची जारी की गई तो इन कर्मचारियों की सेवा के दौरान लगे बेहद नाममात्र के जुर्मानों को आधार बनाकर पात्रता सूची से इनके नाम सीधे काट दिए गए हैं।
इस विभागीय विसंगति का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण तब सामने आया जब पता चला कि एक पीड़ित वनकर्मी का प्रमोशन महज 180 रुपये के छोटे से जुर्माने के कारण रोक दिया गया है। कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि यह दंडात्मक और भेदभावपूर्ण नियम केवल सामान्य इकाई के कर्मचारियों पर ही लागू किया जा रहा है, जबकि विभाग की उत्पादन इकाई के सभी संबंधित कर्मचारियों को बिना किसी बाधा के प्रमोट कर दिया गया है।
विधायक जी से फोन पर चर्चा के दौरान सी.सी.एफ. जबलपुर एम. बघेल ने बताया कि यह पूरा मामला उनके संज्ञान में है और इस विसंगति को दूर करने के लिए उनकी तरफ से भोपाल में पीसीसीएफ (PCCF) को प्रस्ताव भेजा गया है।
भाजपा विधायक श्री ओमप्रकाश धुर्वे - 10 से 11 साल के लंबे अंतराल के बाद कर्मचारियों को बड़ी मुश्किल से पदोन्नति का यह अवसर मिला था, जिसे मामूली जुर्मानों को ढाल बनाकर इस तरह छीना जाना पूरी तरह से अनुचित है। वे इस न्यायसंगत मांग के पूरी तरह समर्थन में हैं और आगामी 20 तारीख से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को सदन के पटल पर उठाएंगे। इसके साथ ही वे व्यक्तिगत रूप से माननीय मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के समक्ष इसको रखेंगे ताकि नियमों में जरूरी सुधार करके पीड़ित वनकर्मियों को जल्द से जल्द उनका जायज हक और न्याय दिलाया जा सके।
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