डिंडोरी (बजाग)। डिंडोरी जिले की बजाग तहसील से जमीन के नामांतरण में गड़बड़ी और विभागीय मिलीभगत का एक ऐसा अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सरकारी सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक शख्स पर कीमती पैतृक जमीन को अपने नाम कराने के लिए सरकारी दस्तावेजों में अपने असली पिता का नाम ही बदलने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद सुकुलपुरा के रहने वाले स्वर्गीय जियालाल वनवासी की कीमती जमीन से जुड़ा हुआ है, जिनका निधन साल 1996 में उनके पुस्तैनी गांव में हुआ था। दादा की मौत के वक्त उनके पोते और अन्य वारिस काफी छोटे थे, जिसके कारण उन्हें बजाग तहसील मुख्यालय में स्थित इस जमीन के रकबे और सटीक स्थान की जानकारी नहीं थी। इसी बात का फायदा उठाते हुए बजाग में ही बगल की जमीन पर रह रहे जियालाल के चचेरे भाई गणेश वनवासी ने इस कथित जालसाजी की रूपरेखा तैयार की।
दस्तावेजों में असली पिता को बदला
परिजनों का आरोप है कि साल 2022 में गणेश वनवासी ने सबसे पहले ग्राम पंचायत से स्वर्गीय जियालाल का एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाया। इसके बाद हल्का पटवारी नर्मदा मुराली के साथ कथित मिलीभगत कर एक फर्जी वंशावली और प्रतिवेदन तैयार करवाया गया। इस खेल को अमलीजामा पहनाने के लिए तहसील न्यायालय से फौती नामा कटवाते समय गणेश ने अपने असली पिता 'हरि लाल वनवासी' की जगह दस्तावेजों में स्वर्गीय 'जियालाल' का नाम दर्ज करवा दिया और खुद को उनका पुत्र दर्शाकर इस कीमती भूखंड को अपने परिवार के सदस्यों के नाम ट्रांसफर करवा लिया। जबकि अन्य शासकीय रिकॉर्ड जैसे मतदाता सूची और आधार कार्ड में गणेश के पिता का नाम हरि लाल ही दर्ज है।
शासकीय पोर्टल से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे कथित खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब जियालाल के पोते शिवराज वनवासी ने डिजिटल जागरूकता दिखाते हुए शासकीय पोर्टल से अपनी पैतृक जमीन के रिकॉर्ड निकाले। उन्होंने देखा कि खसरा नंबर 132 की कीमती जमीन पर पूरी तरह से दूसरे पक्ष का नाम दर्ज हो चुका है। हालांकि, साल 2025 में आरोपी गणेश की भी मौत हो चुकी है। जब इस संबंध में गणेश की पत्नी से बात की गई, तो उन्होंने इस बात की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे शादी के बाद से इसी घर में रह रही हैं और जमीन के कागजी फेरबदल के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता, लेकिन जियालाल उनके दादा ससुर थे और सुकुलपुरा का परिवार उनका ही रिश्तेदार है।
पटवारी की सफाई और प्रशासन की जांच
मामले में जब हल्का पटवारी नर्मदा मुराली से पक्ष लिया गया, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए गए पंचनामे और दस्तावेजों के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके बाद तहसील न्यायालय से फौती नामा काटा गया।
फिलहाल, पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत के बाद मामला पूरी तरह गरमा चुका है। बजाग एसडीएम अक्षय डिगरसे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया है कि जमीन के नामांतरण और फौती नामा में गलत तरीके से नाम जुड़ने की शिकायत प्राप्त हुई है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों और इसमें संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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