ग्राम घुसियामाल में प्रस्तावित राघवपुर बांध परियोजना: घुसियामाल के 5 किमी दायरे में धारा 163 लागू, अगले 2 महीने तक प्रतिबंध | सत्य प्रहार न्यूज़

 डिंडौरी जिले में नर्मदा नदी पर प्रस्तावित राघवपुर-मरवारी बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर क्षेत्र में कानून व्यवस्था, लोक शांति और सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। बांध के कार्यस्थल और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार बढ़ रही भारी भीड़ तथा प्रदर्शनों की स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इस प्रशासनिक आदेश के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण परियोजना के विजन, विस्थापन, मुआवजे और अब तक के घटनाक्रम का पूरा विवरण इस प्रकार है।




राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना घुसियामाल डिंडौरी धारा 163 आदेश और पुलिस बल तैनाती थंबनेल

प्रशासन का अति सख्त धारा 163 का आदेश और प्रमुख प्रतिबंध

ग्राम घुसियामाल में प्रस्तावित राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यस्थल एवं उससे लगे 5 किलोमीटर के दायरे में लोक शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को भांपते हुए प्रशासन ने यह निषेधाज्ञा जारी की है। थाना शाहपुर के प्रतिवेदन और जनसंघर्ष मोर्चा के प्राप्त आवेदनों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद, अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) डिंडौरी, श्री रामबाबू देवांगन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के अंतर्गत एकपक्षीय प्रतिबंधात्मक आदेश पारित किए गए हैं। 



यह आदेश 11 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है और आगामी 2 महीने तक प्रभावशील रहेगा। इस कड़े प्रशासनिक आदेश के दायरे में निम्नलिखित मुख्य प्रतिबंध शामिल किए गए हैं: परियोजना कार्यस्थल और उससे लगे 5 किलोमीटर के दायरे के भीतर किसी भी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, रैली, जुलूस, नारेबाजी, भूख हड़ताल या ज्ञापन देते हुए भीड़ एकत्र करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। उक्त निर्दिष्ट स्थल पर 5 या 5 से अधिक व्यक्तियों का अनधिकृत रूप से एकत्र होना इस पूरी अवधि में वर्जित रहेगा। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई भी व्यक्ति अस्त्र-शस्त्र (धार्मिक आधार व सुरक्षाकर्मियों को छोड़कर), आग्नेय अस्त्र, विस्फोटक पदार्थ, डंडा, राड या कोई अन्य धारदार हथियार लेकर प्रवेश नहीं कर सकेगा। क्षेत्र के अंदर या बाहर बैनर, पोस्टर, पर्ची के जरिए किसी भी प्रकार का प्रसार-प्रसार या लाउडस्पीकर का उपयोग वर्जित रहेगा जो आम नागरिकों में डर, भय या अशांति पैदा करता हो। यह प्रतिबंधात्मक आदेश शासकीय कार्यों, आपातकालीन सेवाओं और विधि सम्मत शासकीय बैठकों पर लागू नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश से व्यथित है, तो वह धारा 163 (5) के तहत न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

क्या है राघवपुर-मरवारी बहुउद्देशीय परियोजना?

यह वृहद बहुउद्देशीय परियोजना डिंडौरी जिले की शाहपुरा तहसील के ग्राम मरवारी के समीप नर्मदा नदी पर प्रस्तावित है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा 6 अगस्त 2021 को ₹1,144.27 करोड़ की कुल लागत से इस परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस महत्वपूर्ण project का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के जल संसाधनों का दोहन कर बिजली और सिंचाई के माध्यम से बुनियादी विकास को गति देना है।

इस परियोजना के पूर्ण होने से 25 मेगावाट विद्युत (बिजली) का उत्पादन किया जाएगा और 17,587 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। बांध में कुल 726.87 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण होगा, जिसमें से 564.47 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल भंडारण क्षमता निर्धारित की गई है। इसके अलावा, कुल उपयोगी भंडारण का 10 प्रतिशत यानी लगभग 56.40 मिलियन घन मीटर जल विशेष रूप से पेयजल व्यवस्था के लिए प्रावधानित किया गया है।

प्रभावित ग्राम, विस्थापन और मुआवजा प्रक्रिया

इस बहुउद्देशीय परियोजना के डूब क्षेत्र के अंतर्गत डिंडौरी और शाहपुरा तहसीलों के कुल 45 ग्राम प्रभावित हो रहे हैं, जिससे लगभग 1,706 परिवारों के विस्थापित होने की संभावना है। भू-अर्जन प्रक्रिया के तहत सभी 45 डूब प्रभावित गांवों की निजी भूमि के लिए धारा-11 और धारा-19 का प्रकाशन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

इनमें से 25 गांवों के प्रस्ताव धारा-23 अवार्ड हेतु प्रस्तुत किए जा चुके हैं। पारदर्शी वित्तीय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मुआवजे के भुगतान हेतु ₹294 करोड़ की भारी-भरकम राशि कलेक्टर के पीडी खाते में पहले ही जमा कराई जा चुकी है। मध्य प्रदेश शासन, नर्मदा विकास विभाग के आदेशानुसार विशेष पैकेज स्वीकृत हो चुका है और अंतिम अवार्ड तैयार कर एसडीएम डिंडौरी/शाहपुरा को सौंप दिए गए हैं। वर्तमान में स्वीकृत अवार्ड की राशि का वितरण कार्य तेजी से प्रगति पर है और अब तक 5 गांवों में लगभग ₹30 करोड़ की राशि का वितरण संबंधित पात्र हितग्राहियों को किया जा चुका है। इसके साथ ही, विस्थापितों के समुचित पुनर्वास और पुनर्स्थापना हेतु डिंडौरी तहसील के ग्राम मुड़ियाकलां में 27.390 हेक्टेयर भूमि का चयन कर लिया गया है।

संवाद, बैठकों का दौर और पिछले दिनों का घटनाक्रम

प्रशासन ने धारा 163 जैसी सख्त कार्रवाई से पहले और उसके साथ-साथ संवाद के रास्ते भी खुले रखे हैं ताकि हर समस्या का शांतिपूर्ण हल निकाला जा सके: 1 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट कार्यालय में कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता में प्रभावित किसानों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी पक्षों की बात सुनकर एक शांतिपूर्ण और न्यायसंगत समाधान खोजना था। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के पावन अवसर पर ग्रामीणों द्वारा गांव में एक छोटी सभा आयोजित कर बांध निर्माण और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई थी। 5 अक्टूबर को ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें विशेष तौर पर पुनर्स्थापन, विस्थापन और मुआवजे से जुड़ी अपनी मांगें प्रमुखता से रखी गई थीं।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि विकास कार्यों में बाधा डालने या लोक शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, वहीं दूसरी ओर प्रभावितों के वैध हितों और संवाद के लिए प्रशासनिक दरवाजे हमेशा खुले हैं।

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