1 सितंबर को हुए अंधे हत्याकांड का पर्दाफाश: आरोपी सलाखों के पीछे, पुलिस की गहन जांच और मनोवैज्ञानिक पूछताछ से खुला राज

 डिंडोरी। कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बहेरा माल में 1 सितंबर को हुई 65 वर्षीय वृद्ध महिला की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी पुलिस ने आखिरकार सुलझा ली है। इस अंधे कत्ल को अंजाम देने वाला आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है और उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है, क्योंकि हत्या की वजह खेत में पानी छोड़ने जैसी एक मामूली बात थी।

क्या हुआ था घटना के दिन? मृतिका कमलाबाई बनवासी (उम्र 65 वर्ष) प्रतिदिन की तरह 1 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे अपने घर से निकली थीं। वह धनवासी बहेरा रोड तिराहा के पूर्व दिशा में पहाड़ी के नीचे स्थित अपने खेत पर अकेले निदाई करने के लिए गई थीं। रोज की दिनचर्या के मुताबिक उन्हें शाम करीब 6 बजे तक घर वापस लौट आना चाहिए था, लेकिन जब वह शाम 7 बजे तक नहीं लौटीं, तो परिजनों की बेचैनी बढ़ने लगी। परिजनों ने गांव, बस्ती और आसपास के पड़ोस में उनकी तलाश शुरू की। रात करीब 8 बजे जब परिजन पहाड़ी के नीचे स्थित खेत पर पहुंचे, तो उन्होंने कमलाबाई को मृत अवस्था में पाया। उनके सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और पूरे चेहरे पर खून फैला हुआ था। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह पूरी घटना 1 सितंबर की सुबह 10 बजे से रात 8 बजे के बीच की है।

डिंडोरी के कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम बहेरा माल में हुए अंधे हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पुलिस और आरोपी।

पुलिस की जांच और  पूछताछ से खुला राज घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मर्ग कायम कर तुरंत जांच शुरू कर दी गई। शुरुआती शॉर्ट पीएम रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि वृद्धा की मौत किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा सिर पर भारी पत्थर से प्रहार करके की गई थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना का दायरा बढ़ाया। मुखबिर तंत्र से मिली सटीक जानकारियों और घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदेही ध्रुवलाल बनवासी (पिता लक्ष्मण लाल बनवासी, उम्र 55 वर्ष, निवासी ग्राम बहेरा) को हिरासत में लिया। पुलिस ने जब आरोपी से अपने ही खास अंदाज यानी मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल सका और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

क्यों और कैसे दिया गया वारदात को अंजाम? आरोपी ध्रुवलाल ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि 1 सितंबर की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच कमलाबाई अपने खेत की मेढ़ से पानी छोड़ रही थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी और विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर आरोपी ने अपना आपा खो दिया और पास में पड़े एक भारी पत्थर को उठाकर वृद्धा के सिर और चेहरे पर पटक दिया। इस brutal हमले से मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

न्याय की कार्रवाई और पुलिस टीम की सफलता वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी कानून की नजरों से बच नहीं सका। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को ज्युडिशियल रिमांड पर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

इस पूरे अंधे हत्याकांड का सफल पर्दाफाश करने में पुलिस टीम की भूमिका सराहनीय रही। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के मार्गदर्शन और कोतवाली प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे के नेतृत्व में पूरी की गई। इस टीम में एस.आई. मुकेश बैरागी, ए.एस.आई. केशलाल मरावी, प्रवीण खम्परिया, प्रधान आरक्षक विनोद माहौर, रोहित पटेल, सतेन्द्र डहेरिया और महिला आरक्षक लकी मिश्रा शामिल रहे।

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