सत्य प्रहार न्यूज़ / डिंडौरी (मध्य प्रदेश)
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय डिंडौरी में वर्ष 2016 से 2025 के बीच हुए 60.65 लाख रुपये से अधिक के बड़े वित्तीय घोटाले और फर्जी भुगतानों के मामले में अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने शिकंजा कस दिया है। पूर्व में कलेक्टर द्वारा कराई गई विभागीय जांच, दो कर्मचारियों के निलंबन और पूर्व प्रभारी CMHO को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद, अब EOW भोपाल इकाई ने मामले में संज्ञान लेते हुए दो पूर्व CMHO, दो तत्कालीन डीपीएमओ और दो लिपिकीय कर्मचारियों सहित कुल छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है।
EOW की गहन जांच में आपराधिक षड़यंत्र का पर्दाफाश
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के अनुसार, इस पूरे घोटाले की बिंदुवार और सूक्ष्म जांच उप पुलिस अधीक्षक स्वर्णजीत सिंह धामी द्वारा संपन्न की गई। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आपस में मिलकर एक सुव्यवस्थित आपराधिक षड़यंत्र रचा। आरोपियों ने अपने शासकीय पदों का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों और पोर्टल की गलत प्रविष्टियों के जरिए सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
कलेक्टर की प्रारंभिक कार्रवाई के बाद EOW का बड़ा एक्शन
घोटाले की शुरुआत में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देश पर एक जांच दल गठित किया गया था, जिसमें संयुक्त कलेक्टर एवं तत्कालीन पेंशन अधिकारी भारती मेरावी शामिल थीं। उस जांच के आधार पर IFMIS पोर्टल पर बिना आवश्यक दस्तावेजों के बिल आगे बढ़ाने वाले सहायक ग्रेड-3 एवं वेरिफायर गुलाब प्रसाद साहू तथा क्रिएटर प्रकाश सिंह परस्ते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। वहीं तत्कालीन प्रभारी CMHO डॉ. रमेश मरावी को कारण बताओ नोटिस थमाया गया था। अब EOW ने इस पूरी प्रक्रिया में शामिल सभी 6 मुख्य चेहरों पर एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।
इन अधिकारियों-कर्मचारियों पर दर्ज हुई नामजद FIR
EOW भोपाल ने प्रकरण में तत्कालीन CMHO डॉ. आर.के. मेहरा, तत्कालीन CMHO डॉ. रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन DPMO डॉ. बलदेव सिंह भलावी, तत्कालीन DPMO डॉ. भरत सिंह टेकाम, सहायक ग्रेड-3 (IFMIS वेरिफायर) गुलाब प्रसाद साहू और सुपरवाइजर (IFMIS क्रिएटर) प्रकाश सिंह परस्ते को मुख्य आरोपी बनाया है।
फर्जीवाड़े का तरीका: एरियर, परिवहन और वेंडर भुगतानों में धांधली
1 अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के दौरान अंजाम दिए गए इस घोटाले में बिना किसी कार्ययोजना और सक्षम स्वीकृति के खजाने से राशि निकाली गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बिना किसी कार्यालयीन रिकॉर्ड या गणना पत्रक के जानबूझकर फर्जी प्रविष्टियां करके ₹49,89,680 का एरियर भुगतान दर्शाया गया। इसके अलावा, गुलाब साहू द्वारा बिना किसी सक्षम आदेश के ₹4,78,431 का एरियर अवैध रूप से जारी किया गया। सामग्री क्रय, परिवहन, फर्नीचर, भाड़ा, बिजली और छुट्टियों के नाम पर ₹5,89,209 का नियम विरुद्ध भुगतान किया गया, जबकि वेंडरों को ₹3,710 का दोहरा भुगतान और ₹4,560 का गलत भुगतान किया गया। कुल मिलाकर ₹60,65,590 की सरकारी धनराशि का गबन प्रमाणित हुआ है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW भोपाल ने आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)(a), 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 316(5) और 61(2) के तहत अपराध पंजीकृत किया है। EOW की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से डिंडौरी जिले के पूरे प्रशासनिक व स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
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