अदालत का अल्टीमेटम: 24 अक्टूबर को हाजिर हों अधिकारी
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एवं प्रथम जिला न्यायाधीश डी. एस. मंडलोई द्वारा जारी नोटिस (दिनांक 26 सितंबर 2026) के अनुसार, राज्य शासन के इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों को 24 अक्टूबर 2026 को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि तक अधिकारियों द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता या वे उपस्थित नहीं होते हैं, तो मामले में एकतरफा कार्रवाई (Ex-Parte Proceedings) की जाएगी और प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर अंतिम फैसला सुना दिया जाएगा।
वकीलों ने उठाई आवाज: "लाखों की लागत के बाद भी लग रहे हिचकोले"
मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता सम्यक जैन, मनन अग्रवाल और के. के. सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार आ रही जनसमस्याओं और तकनीकी खामियों को देखते हुए उन्होंने लोक अदालत में याचिका दायर की थी।
वकीलों ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं:
राइडिंग सरफेस और स्मूथनेस की कमी: सड़क बनने का काम पूरा घोषित होने के बाद भी वाहनों की आवाजाही के दौरान तेज झटके (jolts) महसूस होते हैं, जो सीधे तौर पर सड़क की घटिया फिनिशिंग और राइडिंग सरफेस की खराबी को दर्शाते हैं।
इंजीनियरिंग मानकों का उल्लंघन: सड़क के ढलान (gradients) तथा पुलों और पुलियों के पहुंच मार्गों (bridge approaches) के निर्माण में तय तकनीकी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
प्रशासनिक व ठेकेदारी लापरवाही: परियोजना के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control), अधिकारियों और कंसल्टेंट्स की निगरानी व्यवस्था तथा ठेके की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन हुआ है।
जनसुरक्षा और व्यावसायिक यातायात पर बड़ा खतरा
अधिवक्ताओं का कहना है कि जबलपुर-डिंडोरी राष्ट्रीय राजमार्ग जिले की जीवनरेखा है, जिस पर दिन-रात बसें, एम्बुलेंस, निजी वाहन और भारी व्यावसायिक गाड़ियां दौड़ती हैं। ऐसे में सड़क की खराब गुणवत्ता न केवल यात्रियों के सफर को कष्टदायक बनाती है, बल्कि हादसों का कारण बनकर जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
अब पूरी क्षेत्र की जनता और कानूनी हलकों की नजर 24 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि लोक निर्माण विभाग और शासन के आला अफसर अदालत के तीखे सवालों का क्या जवाब देते हैं।

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