शक्ति की उपासना का पावन महापर्व शारदीय नवरात्रि अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में मां भगवती के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं नौ देवियों की तिथियां, दैनिक पूजन विधि, उनके विशेष मंत्र तथा सिद्धि प्राप्ति के सरल उपाय।
घटस्थापना (बैठकी) शुभ मुहूर्त और समापन का समय
बैठकी (घटस्थापना) तिथि: 11 अक्टूबर 2026 (रविवार)
प्रातःकाल घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक (अवधि लगभग 3 घंटे 52 मिनट)
अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
चौघड़िया मुहूर्त: लाभ और अमृत मुहूर्त सुबह 09:00 बजे से सुबह 11:56 बजे तक।
महापूजन व महानवमी: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
विजयादशमी व विसर्जन: 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को प्रातः 06:21 बजे से 08:38 बजे के बीच घट व जवारे विसर्जन।
9 देवियों की तिथियां, पूजन विधि, विशेष मंत्र और सरल उपाय
प्रथम दिन - मां शैलपुत्री:
तिथि एवं पूजन विधि: प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। मां को सफेद वस्त्र और गाय का शुद्ध घी या उससे बनी मिठाई अर्पित करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: मां शैलपुत्री को गाय का शुद्ध घी अर्पित करने और उनके मंत्र का 108 बार जाप करने से आरोग्य और स्थिर मन की प्राप्ति होती है।
द्वितीय दिन - मां ब्रह्मचारिणी:
तिथि एवं पूजन विधि: द्वितीया तिथि को तपस्या की देवी मां ब्रह्मचारिणी का पूजन होता है। इन्हें शक्कर, पंचामृत और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
विशेष मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: माता को शक्कर का भोग लगाकर जप करने से जीवन में संयम, तप और एकाग्रता की सिद्धि प्राप्त होती है।
तृतीय दिन - मां चंद्रघंटा:
तिथि एवं पूजन विधि: तृतीया तिथि को मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मां को दूध, दूध से बनी खीर और लाल पुष्प चढ़ाएं।
विशेष मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: इस दिन कच्चे दूध की खीर का भोग लगाने से व्यक्ति को निर्भयता, साहस और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
चतुर्थ दिन - मां कूष्मांडा:
तिथि एवं पूजन विधि: चतुर्थी तिथि को ब्रह्मांड की रचयिता मां कूष्मांडा का पूजन होता है। मां को मालपुआ और कद्दू का भोग लगाएं तथा कुमकुम से अर्चन करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी कूष्मांडायाै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: मां को मालपुए का भोग लगाने और विधिवत पूजा करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और डिप्रेशन व नकारात्मकता दूर होती है।
पंचम दिन - मां स्कंदमाता:
तिथि एवं पूजन विधि: पंचमी तिथि को कार्तिकेय (स्कंद) की माता की पूजा की जाती है। मां को केले का भोग और पीले पुष्प अर्पित करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक जातकों के लिए इस दिन मां को इलायची व केले का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है।
षष्ठम दिन - मां कात्यायनी:
तिथि एवं पूजन विधि: षष्ठी तिथि को महर्षि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी की पूजा होती है। मां को शहद और मीठे पान का भोग लगाएं।
विशेष मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और योग्य वर-वधू की प्राप्ति के लिए मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाकर इस मंत्र का जाप करें।
सप्तम दिन - मां कालरात्रि:
तिथि एवं पूजन विधि: सप्तमी तिथि को संकटों का नाश करने वाली मां कालरात्रि का पूजन करें। मां को गुड़ और नीले पुष्प अर्पित करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: गुड़ का नैवेद्य अर्पित करने से तांत्रिक बाधाएं, भय और आकस्मिक संकटों का नाश होता है तथा विशेष सिद्धि मिलती है।
अष्टम दिन - मां महागौरी:
तिथि एवं पूजन विधि: अष्टमी तिथि (महाअष्टमी) को मां महागौरी का पूजन और कन्या अर्चन होता है। मां को नारियल, हलवा-पूरी और चना अर्पित करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: इस दिन कंजक पूजन और महागौरी को नारियल अर्पित करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में पवित्रता व सुख शांति आती है।
नवम दिन - मां सिद्धिदात्री:
तिथि एवं पूजन विधि: नवमी तिथि (महानवमी) को सभी सिद्धियों की देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मां को तिल और हलवा-पूरी अर्पित कर हवन व कन्या पूजन संपन्न करें।
विशेष मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
सिद्धि प्राप्ति का सरल उपाय: काले तिल का भोग लगाने और पूर्ण समर्पण के साथ इस दिन साधना करने से साधक को अणिमा, महिमा आदि आठों सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
12 राशियों के अनुसार विशेष उपाय और भोग
मेष राशि: लाल वस्त्र धारण कर मां को लाल चुनरी, गुड़ और अनार अर्पित करें।
वृषभ राशि: मां को सफेद चंदन, मक्खन-मिश्री और मखाने की खीर अर्पित करें।
मिथुन राशि: मां को हरी इलायची, दूर्वा और हरे फल अर्पित करें।
कर्क राशि: मां को दूध से बनी बर्फी, सफेद पुष्प और गंगाजल अर्पित करें।
सिंह राशि: मां को केसरिया मिठाई, लाल कनेर का फूल और तांबे का सिक्का अर्पित करें।
कन्या राशि: मां को शहद, मीठा पान और हरी चुनरी अर्पित करें।तुला राशि: मां को सफेद वस्त्र, दही और बताशे का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि: मां को गुड़ के लाडू, लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें।
धनु राशि: मां को बेसन के लड्डू, हल्दी की गांठ और पीले पुष्प अर्पित करें।
मकर राशि: मां को काले तिल, नीले पुष्प और सूखे मेवे अर्पित करें।
कुंभ राशि: मां को नारियल, गुड़ और कस्तूरी चढ़ाएं।
मीन राशि: मां को केले, चने की दाल और पीली मिठाई अर्पित करें।
विद्यार्थियों, नौकरीपेशा और व्यापारियों के लिए विशेष सफलता के उपाय
विद्यार्थियों के लिए (अध्ययन व एकाग्रता): नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता के समक्ष हरे रंग के आसन पर बैठकर 108 बार 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' का जाप करें और 5 हरी इलायची अपनी किताब में रखें।
नौकरीपेशा लोगों के लिए (प्रमोशन व नई जॉब): नवरात्रि के तीसरे व सातवें दिन मां चंद्रघंटा और मां कालरात्रि के समक्ष कपूर का दीपक जलाएं तथा 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा' मंत्र का प्रतिदिन जाप करें।
व्यापारियों के लिए (व्यापार वृद्धि व धन लाभ): अष्टमी या नवमी तिथि पर अपने व्यावसायिक स्थल पर मां दुर्गा का ध्यान करते हुए 11 कौड़ियां और सिद्ध सिंदूर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें।
सही पंडित से सलाह की अपील
शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक क्षेत्र में स्थानीय तिथि मान और गृह-नक्षत्रों का प्रभाव अलग-अलग होता है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं से विनम्र अपील है कि वे पूजा के सूक्ष्म समय, मंत्र जाप, संकल्प तथा हवन-कुंड की सही दिशा की जानकारी के लिए अपने स्थानीय योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
इन नौ दिनों में क्या न करें: व्रत या सामान्य दिनों में भी तामसिक भोजन (जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज) का सेवन नहीं करना चाहिए, बाल और नाखून काटने या दाढ़ी बनवाने से बचना चाहिए, काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना चाहिए, घर की पवित्रता और साफ-सुथरा माहौल बनाए रखें तथा किसी भी रूप में असत्य बोलने, वाद-विवाद करने या किसी का अनादर करने से पूरी तरह दूर रहें।
अस्वीकरण (Disclaimer): हमारा उद्देश्य किसी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। यह समाचार विद्वान पंडितों और पंचांग पर आधारित है। कर्म प्रधान है, इस पूजन का उद्देश्य मानव को सत्कर्मों की ओर जोड़ने और सही रास्ते पर चलने का है।

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