विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जिले में कार्यशालाएं: 'जिंदगी अनमोल है' का संदेश

 

डिंडौरी में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर कार्यशालाएं: 'जिंदगी अनमोल है' का संदेश



डिंडौरी जिले में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर युवाओं और विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में यह संदेश देना रहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और कठिन परिस्थितियों में संवाद स्थापित कर किसी भी संकट से बाहर निकला जा सकता है।

चंद्र विजय महाविद्यालय में आनंद विभाग की कार्यशाला आनंद विभाग के तत्वावधान में चंद्र विजय महाविद्यालय, डिण्डौरी में एक विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान विद्यार्थियों को मानसिक तनाव, अवसाद एवं जीवन की अन्य चुनौतियों का सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने जोर दिया कि कठिन परिस्थितियों में कभी भी अकेले न रहें, बल्कि अपने परिवार, मित्रों और विश्वसनीय लोगों से खुलकर संवाद करें। कार्यक्रम में जिला सांख्यिकी अधिकारी श्री चैन सिंह कुंजाम, आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती मंजुषा शर्मा, श्री अभिषेक बंसल, अन्वेषक सहित महाविद्यालय के प्रोफेसर और स्टाफ उपस्थित रहे।

शासकीय आईटीआई शाहपुरा में आरकेएसके के तहत विशेष सत्र दूसरी ओर, शासकीय आईटीआई शाहपुरा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शाहपुरा के तत्वावधान में आरकेएसके (RKSK) कार्यक्रम के तहत एएफएचसी (AFHC) गतिविधि का आयोजन किया गया। परामर्शदाता एवं मास्टर ट्रेनर श्री अब्दुल जाकिर खान ने आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को बताया कि यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक तनाव, निराशा या व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे संकेतों से गुजर रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें।

गेटकीपर (मित्रम्) मॉड्यूल और आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी कार्यशालाओं के दौरान 'गेटकीपर (मित्रम्)' मॉड्यूल के महत्व को समझाया गया, जिसके तहत समुदाय के लोगों को मानसिक संकट से जूझ रहे व्यक्ति की पहचान कर उसे समय पर सहायता और चिकित्सीय परामर्श से जोड़ने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संचालित Tele-MANAS हेल्पलाइन नंबर 14416 और MANHIT App के जरिए शुरुआती स्क्रीनिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मानसिक परेशानी की स्थिति में मदद मांगना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा कदम है। कार्यक्रमों का सार यही रहा कि “ज़िंदगी अनमोल है — बात करें, सुनें, साथ दें और समय पर मदद लें।”

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