अतिरिक्त प्रभार के फेर में डिंडौरी के किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं, चर्चा है कि साहब यहां सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करने आते हैं
डिंडौरी जिले की सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामला लैंप्स बी पैक्स पड़रिया कला का सामने आया है, जहां स्थानीय किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों से अधिक राशि वसूलने और भुगतान की रसीद न देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों की शिकायत है कि ऋण और खाद के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जाते हैं, वहीं स्टेशनरी के नाम पर भी अवैध रूप से ली जाने वाली रकम की कोई रसीद नहीं दी जाती।
मामले को लेकर पड़रिया कला के किसान जगदीश प्रसाद ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने KCC के जरिए ऋण लिया था। उनके अनुसार, ऋण राशि जमा करने के बावजूद उन्हें किसी भी प्रकार की रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। अलग-अलग सत्रों में KCC और खाद के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूले जाने के बाद भी प्रबंधक द्वारा टालमटोल किया जाता है। ऐसा ही दर्द बयां करते हुए दूसरे किसान चेतराम नागेश ने भी लैंप्स प्रबंधक पीतम चंदेल पर लेन-देन में पारदर्शिता न रखने और वसूली के बाद रसीद न देने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो किसानों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अन्नदाताओं की है।
इस पूरे प्रकरण के बीच स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सहायक आयुक्त अरुण कुमार मसराम के पास मंडला जिले का भी अतिरिक्त प्रभार है। क्षेत्र में दबी जुबान से यह बात कही जा रही है कि अधिकारी डिंडौरी सिर्फ खानापूर्ति और कागजी औपचारिकताएं निभाने आते हैं। लचर व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर डिंडौरी के गरीब और सीधे-सादे किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आता।
किसानों द्वारा लिखित शिकायत सहकारिता विभाग के तक पहुंचाई जा चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अब एक जांच टीम गठित किए जाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, जब इस पूरे मामले पर लैंप्स प्रबंधक पीतम चंदेल का पक्ष लिया गया तो उन्होंने कहा कि रसीद आजकल ऑनलाइन निकलती है जिसे कोई भी किसान कभी भी अपने मोबाइल और कियोस्क इंटरनेट आदि से चेक कर सकता है कई बार नेटवर्क ना होने से रसीद नहीं दे पाते हैं उन्होंने अधिकारियों द्वारा जांच पर आने की बात भी की है अब देखना होगा कि अधिकारी जाकर क्या कैसी जांच करते हैं और क्या रिपोर्ट सामने आती हैअब सबकी निगाहें सहकारिता विभाग की जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह साफ हो सकेगा
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