जबलपुर: वार्ड 72 सप्त ऋषि नगर की जनता का फूटा गुस्सा, बदहाल सड़कों और जलभराव से त्रस्त रहवासियों ने महापौर को सौंपा ज्ञापन


संस्कारधानी जबलपुर के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 72, लामती विजयनगर कॉलोनी स्थित सप्त ऋषि नगर के रहवासी इन दिनों गंभीर मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं और उनका सब्र अब पूरी तरह से टूट चुका है। मानसून के आगमन के साथ ही इस क्षेत्र की जीवनशैली और आवाजाही पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई है। यहाँ की जर्जर सड़कों और जलभराव की गंभीर समस्या ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे स्थिति यह बन गई है कि लोगों का अपने घरों से सुरक्षित बाहर निकलना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले अभिभावकों, बाहर काम पर जाने वाले युवाओं, दूध बांटने वाले वेंडर, अखबार डालने वाले हॉकर और हर आम राहगीर को रोजमर्रा के जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सप्त ऋषि नगर से नगर निगम द्वारा हर साल नियमित रूप से जलकर, संपत्ति कर और अन्य स्थानीय करों की वसूली पूरी सख्ती के साथ की जाती है, लेकिन जब बात बुनियादी सुविधाओं को जमीन पर उतारने की आती है, तो जनता के हाथ सिर्फ निराशा ही लगती है। कॉलोनी की सड़कों की हालत इतनी ज्यादा दयनीय हो चुकी है कि वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं बचा है। सड़कों की ऊपरी परत उखड़ चुकी है, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें खतरनाक नुकीली गिट्टियां बाहर झांक रही हैं और बारिश का पानी भर जाने के कारण इन गड्ढों का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि आए दिन दुपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। नागरिकों को अपनी गाड़ियां बेहद बचा-बचाकर और जान जोखिम में डालकर निकालनी पड़ रही हैं।


इस पूरी बदहाली के बीच स्थानीय जनता का गुस्सा वार्ड के जनप्रतिनिधियों और विशेषकर वार्ड पार्षद के रवैये के खिलाफ सबसे ज्यादा फूट पड़ा है। रहवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि चुनाव जीतने के बाद से आज तक वार्ड पार्षद ने कभी भी इस कॉलोनी की सुधि नहीं ली है। आलम यह है कि जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। कई बार फोन करने के बावजूद वार्ड पार्षद न तो खुद फोन उठाती हैं और न ही वार्ड का दौरा करना उचित समझती हैं। जनता का आरोप है कि कागजों पर भले ही पार्षद कोई और हो, लेकिन असलियत में वार्ड की पार्शदी उनके पतियों द्वारा चलाई जा रही है, जिन्हें आम जनता के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं है।

सप्त ऋषि नगर की समस्याओं का दायरा सिर्फ जर्जर सड़कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां का पूरा बुनियादी ढांचा चरमरा चुका है। कॉलोनी के निवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले कई सालों से वार्ड की नालियों की ढंग से सफाई तक नहीं कराई गई है, जिसके कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण यह गंदा पानी मच्छरों का केंद्र बन रहा है, जिससे इलाके में गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। इसके साथ ही, पूरे क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिसके कारण शाम ढलते ही पूरी कॉलोनी में अंधेरा छा जाता है और सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है।

जब स्थानीय नागरिकों का इन सारी समस्याओं के बीच रहना असहनीय हो गया, तो उन्होंने एकजुट होकर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की। कॉलोनी के तमाम पीड़ित रहवासियों ने मिलकर जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नु से सीधी मुलाकात की। महापौर के समक्ष नागरिकों ने अपनी पीड़ा को विस्तार से रखते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें वार्ड की समस्याओं का सिलसिलेवार जिक्र था। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि सप्त ऋषि नगर को इस नरकीय जीवन से जल्द से जल्द मुक्ति दिलाई जाए।

नागरिकों की बातों को सुनने के बाद महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नु ने पूरे मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया। महापौर ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और बहुत जल्द वे खुद सप्त ऋषि नगर का औचक निरीक्षण करने पहुंचेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत, नाली सफाई और स्ट्रीट लाइट सुधारने के कार्य तुरंत शुरू किए जाएं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सप्त ऋषि नगर की जनता में एक उम्मीद की किरण जागी है, लेकिन रहवासियों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सत्य प्रहार (Satya Prahar) अपनी जिम्मेदार पत्रकारिता और स्थानीय मुद्दों की सटीक पड़ताल के तहत इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

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