जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों प्रशासनिक फेरबदल और कार्यप्रणाली को लेकर खासी चर्चाओं में है। डिंडौरी विकासखंड के पड़रिया कला से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां वर्ष 2017 से संचालित 'मां नर्मदा पब्लिक स्कूल' में कक्षा 1 से 8 तक के करीब 100 बच्चों की पढ़ाई महज दो छोटे कमरों और एक हॉल के भरोसे चल रही है। एक तरफ जहां मासूमों का भविष्य अधर में है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक व्यवस्था और महकमे के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर भी अब कई बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।
क्या सिर्फ मीडिया के सामने आने पर ही जागता है तंत्र?
स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है और सवाल यह उठ रहा है कि आखिर व्यवस्था की ऐसी पोल सिर्फ मीडिया के सामने ही क्यों उजागर होती है? जमीनी हकीकत से वाकिफ होने के बावजूद क्या जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब नजर नहीं आता? अगर नियमों को ताक पर रखकर इस तरह के स्कूल संचालित हो रहे हैं, तो संबंधित महकमा क्या सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने तक सीमित है? आखिर जमीनी निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति क्यों की जाती है और जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुर्सियों पर बैठकर कर क्या रहे हैं?
सुविधाओं के नाम पर सिर्फ छलावा
पड़रिया कला के इस स्कूल के पास न तो पर्याप्त कमरे हैं, न खेल मैदान और न ही शौचालय। एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है और 100 बच्चों पर मात्र 5 शिक्षक तैनात हैं। इसके बावजूद अभिभावकों से हर महीने बाकायदा प्रवेश और मासिक फीस वसूली जा रही है। जब संचालक कमल प्रजापति से इस बारे में बात की गई, तो उनका रटा-रटाया जवाब सामने आया कि "धीरे-धीरे व्यवस्था की जा रही है।" सवाल यह है कि आखिर बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह के खिलवाड़ की छूट कब तक मिलती रहेगी?
नए साहब के 2 महीने का कार्यकाल और 'एक सूत्रीय कार्यक्रम' की चर्चा!
महकमे में हाल ही में आए नए साहब के कार्यकाल को अभी बमुश्किल दो महीने ही बीते हैं, लेकिन इन साठ दिनों के भीतर ही विभागीय गलियारों और अंदरखाने में सुगबुगाहट तेज हो गई है। अपुष्ट सूत्रों के हवाले से यह बात खुलकर सामने आ रही है कि जिले में मानो कोई 'एक सूत्रीय कार्यक्रम' चलाया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर कुछ चुनिंदा और विशेष लोगों पर ही विशेष कृपा बरसाए जाने की चर्चा है।
विभाग के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, प्रशासनिक कसावट लाने का दावा करने वाले नए मुखिया के कार्यकाल में मैदानी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चर्चा है कि एक तरफ जहां कई स्कूल बदहाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ खास चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर आंखें मूंद ली गई हैं। महकमे के भीतर दबी जुबान से यह भी कहा जा रहा है कि जिन मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी, वहां संभल-संभलकर कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रभारी जिला परियोजना समन्वयक (DPC) अमित गौलिया
“प्राइवेट स्कूल पड़रिया कला में जो भी कमियां हैं, वहां टीम भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा और नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है या फिर जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और अंदरखाने चल रही इन नकारात्मक चर्चाओं पर अंकुश लगाने के लिए उच्च स्तर से कोई ठोस कदम उठाया जाता है। अभिभावकों और क्षेत्रवासियों की निगाहें अब पूरी तरह से विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

0 टिप्पणियाँ