डिंडौरी जिले में अपनी विभिन्न लंबित मांगों और व्यवस्थाओं के विरोध में मध्यप्रदेश कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। जिला कार्यालय में संघ से जुड़े सभी अधिकारी एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से कलमबंद हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों ने शासन के सामने अपनी मुख्य समस्याएं और नाराजगी खुलकर सामने रखी हैं।
एचआरएमएस प्रणाली की ई-अटेंडेंस और वेतनमान का विरोध
हड़ताल पर बैठे अधिकारियों का मुख्य विरोध एचआरएमएस (HRMS) प्रणाली के अंतर्गत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि इस ऐप के माध्यम से कार्यालय या फील्ड कार्यक्षेत्र में आने और जाने के समय पर अटेंडेंस दर्ज करने की बाध्यता तय की गई है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही, अधिकारी लंबे समय से चली आ रही अपनी वेतन संबंधी मांग, जिसमें 2800 ग्रेड पे का लाभ प्रदान किया जाना शामिल है, उसकी भी पुरजोर मांग कर रहे हैं।
जिला स्तर पर अधिकारियों की भागीदारी और अल्टीमेटम
डिंडौरी जिले में पदस्थ कृषि विस्तार अधिकारियों की संख्या लगभग 47 है, और वे सभी इस सामूहिक आंदोलन में पूरी तरह शामिल हैं। संघ द्वारा शासन को पूर्व में ही 10 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया जा चुका था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन स्तर पर उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 11 अगस्त से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का बड़ा कदम उठाया जाएगा। वर्तमान में भी वे अनिश्चितकालीन हड़ताल की राह पर हैं और सरकार के साथ संवाद स्थापित करने के प्रयास लगातार जारी रखे हुए हैं।
विभागीय कार्यों और मैदानी व्यवस्थाओं पर असर
कृषि विस्तार अधिकारियों के इस तरह काम से विरत रहने के कारण प्रशासनिक और मैदानी स्तर पर विभागीय कार्यों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। हालांकि वर्तमान में कार्यों को किसी तरह प्रबंधित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन स्थिति को संभालना मुश्किल साबित हो रहा है। जानकारों का मानना है कि इस विरोध प्रदर्शन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से जुड़ी योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन के कार्यों पर सीधा असर पड़ना तय है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस मामले में आगे क्या निर्णय और कदम उठाता है।
इस संबंध में जेडी कृषि श्री संजय दोशी ने बताया कि अधिकारियों के हड़ताल पर जाने से समस्या तो आ रही है, पर अभी मैनेज कर रहे हैं। आगे शासन का जो भी आदेश और रुख होगा, उस हिसाब से कार्रवाई होगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और किसानों के हित में हड़ताल का क्या समाधान निकलता है।
0 टिप्पणियाँ