उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार और स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत शासकीय आदर्श महाविद्यालय, शहपुरा (जिला डिण्डौरी) में आज एक सितंबर 2026 को “जैविक कृषि : इसकी आवश्यकता एवं वैश्विक संभावनाएं” विषय पर आधारित एक माह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का गरिमाममय शुभारंभ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री पी.एस. वरकड़े के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और वैश्विक संभावनाओं से अवगत कराना है। कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जहां गूगल फॉर्म के जरिए निर्धारित सीटों से दोगुने पंजीकरण प्राप्त हुए।
मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का आरंभ
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं प्राचार्य श्री पी.एस. वरकड़े, जैविक कृषि विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक श्री बिहारी लाल साहू, श्री प्रकाश झारिया, श्री भगवत सिंह धुर्वे, डॉ. नरेन्द्र सिंह ठाकुर, डॉ. वीणा शिवहरे, डॉ. सुषमा मिश्रा और डॉ. ज्योति त्रिपाठी द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में कु. निहालिका के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात, कु. भूमिका के स्वागत गीत ने उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों का मन मोह लिया।
प्रकृति का नियम ही सर्वश्रेष्ठ कृषि प्रणाली: बिहारी लाल साहू
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में प्रकृति और कृषि के अनूठे तालमेल को बहुत ही सरल और प्रभावी तरीके से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एक गहरा संदेश दिया कि जंगल के पेड़ों को यूरिया कौन देता है, कीटनाशक का छिड़काव कौन करता है, उन्हें पानी कौन देता है, लेकिन जब समय आता है, तब पेड़ फलों से लद जाते हैं। जंगल के पेड़ के किसी भी पत्ते को तोड़ लीजिए और लैब में टेस्ट करा लीजिए, उसमें एक भी पोषक तत्व की कमी नहीं मिलेगी। जंगल में जो नियम काम करता है, वही हमारे खेत में काम करना चाहिए, और यही प्राकृतिक कृषि और उसका मूल सिद्धांत है। श्री साहू और श्री प्रकाश झारिया जैसे शहर के विख्यात विशेषज्ञों द्वारा यह प्रशिक्षण दो अलग-अलग बैचों में दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसका लाभ उठा सकें।
रिकॉर्ड पंजीकरण और विद्यार्थियों में भारी उत्साह
कार्यक्रम के संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक (सांख्यिकी) डॉ. नरेन्द्र सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि इस प्रशिक्षण को लेकर विद्यार्थियों में जबरदस्त क्रेज है। गूगल फॉर्म के माध्यम से हुए पंजीयन में निर्धारित संख्या से दोगुने आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो यह साबित करता है कि आज की युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के प्रति कितनी जागरूक और उत्सुक है। समारोह के दौरान महाविद्यालय परिवार के कई प्रतिष्ठित सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें श्री अभिषेक पटेल, डॉ. रश्मि चक्रवर्ती, डॉ. निहारिका सेंगर, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. परमेश कुमार साकेत, सुश्री कृति जैन, सुश्री आकांक्षा और डॉ. ए.के. झारिया प्रमुख रूप से शामिल रहे।
आगामी सत्रों में इन विषयों पर होंगे विशेष व्याख्यान
यह एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में महाविद्यालय के अन्य विशेषज्ञ शिक्षक भी अपने ज्ञान से विद्यार्थियों को लाभान्वित करेंगे। व्याख्यान देने वाले प्रमुख प्राध्यापकों में डॉ. अजय कुमार राय, डॉ. बसंती चौहान, डॉ. कल्पना सागर, डॉ. खेमराज कनौजिया, डॉ. प्रीत नेगी, डॉ. प्रतिभा उरमलिया, डॉ. अंचल वर्मा, डॉ. राजू रैदास और डॉ. सी.एल. शामिल हैं। ये सभी शिक्षक जैविक कृषि की उपयोगिता, इसके आर्थिक महत्व और वैश्विक बाजार में इसकी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डिण्डौरी जिले के विद्यार्थियों के करियर निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि उन्हें हरित भविष्य की ओर बढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगा।

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